फटे वस्त्रों में घूम रही गर्भवती महिला ने दिया बच्चे को जन्म

झाबुआ। कुछ दिनों पहले जिले के पेटलावद में एक दृश्य ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया था। एक महिला, जो अर्धनग्न अवस्था में थी और गर्भवती दिख रही थी, मानसिक अस्थिरता के कारण सड़कों पर भटक रही थी। उसकी स्थिति दयनीय थी, लोग उसकी तरफ देखते तो जरूर, लेकिन कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। इस स्थिति की खबर दुर्गा वाहिनी की जिला संयोजिका संगीता त्रिवेदी तक पहुंची। एक संवेदनशील और जिम्मेदार महिला होने के नाते, संगीता तुरंत अपनी टीम के साथ वहां पहुंचीं। महिला की स्थिति देखकर उन्होंने अनुमान लगाया की वह किसी भयानक घटना का शिकार हो चुकी है और अब मदद के लिए पुकार रही है। संगीता जानती थीं कि यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की परीक्षा थी। संगीता ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को सूचित किया। साथ ही उन्होंने मेघनगर निवासी समाजसेवी राजेन्द्र श्रीवास्तव से संपर्क किया।

श्रीवास्तव ने महिला को पहचान लिया

राजेन्द्र नीरज श्रीवास्तव, जो मेघनगर के ग्रामीण वनवासी संघ से जुड़े थे, ने इस खबर को सुनते ही महिला को पहचान लिया। उन्होंने बताया कि यह वही महिला है, जिसे उन्होंने 5 साल पहले महाराष्ट्र के नांदेड़ से वापस लाकर उसके घर पहुंचाया था, लेकिन दुर्भाग्यवश, परिवार में सहारा न होने के कारण वह फिर से बेघर हो गई और किसी अनैतिक व्यक्ति की दरिंदगी का शिकार हो गई, जिससे वह गर्भवती हो गई थी। श्रीवास्तव ने पेटलावद थाना प्रभारी दिनेश शर्मा से चर्चा की। थाना प्रभारी शर्मा ने तुरंत मामले को गंभीरता से लिया और इंदौर की एक निजी सेवा संस्था के संचालक जय्यु जोशी से संपर्क करवाया। जय्यु जोशी ने महिला को इंदौर स्थित एक निराश्रित सेवाश्रम में जगह दिलाने की व्यवस्था की।

महिला ने दिया स्वस्थ बच्चे को जन्म

लेकिन असली चुनौती महिला के स्वास्थ्य और उसकी प्रसूति की थी। उसे तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता थी। महिला को इंदौर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को गंभीर बताया। संगीता त्रिवेदी, राजेन्द्र श्रीवास्तव, और दिनेश शर्मा इस पूरी प्रक्रिया में लगातार सक्रिय रहे। यह टीम एक पल के लिए भी पीछे नहीं हटी। हर कदम पर उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कभी संसाधनों की कमी, तो कभी लोगों की असंवेदनशीलता, लेकिन इन सबके बीच, इनकी इंसानियत और हौसला अडिग रहा। आखिरकार, महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। वह लड़का था। मां और बच्चा दोनों सकुशल थे। जब यह खबर इस महापरमार्थ से जुड़े अन्य सदस्यों को मिली, तो उनमें जैसे खुशी की लहर दौड़ गई। इस पूरी घटना में पुलिस प्रशासन, थाना प्रभारी दिनेश शर्मा, संगीता त्रिवेदी, राजेन्द्र श्रीवास्तव, जय्यु जोशी और यश पराशर ने जो योगदान दिया, वह अविस्मरणीय है। इनके अथक प्रयासों ने इंसानियत की लाज रखी।

16 झाबुआ-1- महिला को भोजन कराते दुर्गा वाहिनी के सदस्य

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