ग्वालियर, 14 जनवरी (वार्ता) मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर अविनाश तिवारी व राजस्थान के बासवाड़ा के कुलगुरु के डॉ के एस ठाकुर व अन्य के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ई.ओ.डब्ल्यू) में अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
ईओडब्ल्यू पुलिस अधीक्षक दिलीप सिंह तोमर ने बताया कि आवेदक अरूण कुमार शर्मा निवासी दुर्गा कालोनी मुरार के द्वारा ईओडब्ल्यू में संचालक शिवशक्ति महाविद्यालय ग्राम झुण्डपुरा तहसील सबलगढ़ जिला मुरैना के विरूद्ध फर्जी रूप से कॉलेज संचालित करने के शिकायत की गई थी। जिसकी जांच ईओडब्ल्यू इकाई ग्वालियर द्वारा की गई। जांच उपरांत प्राप्त साक्ष्य के आधार पर पाया गया कि शिवशक्ति महाविद्यालय ग्राम झुण्डपुरा के संचालक रघुराज सिंह जादौन द्वारा अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जिसके आधार पर कॉलेज की मान्यता एवं संबंद्धता प्राप्त कर छात्रों का फर्जी प्रवेश दिखाकर स्कॉलरशिप व अन्य मदो के लाभ प्राप्त कर शासन को आर्थिक क्षतिकारित की गई।
जानकारी के अनुसार जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालय के निरीक्षण के लिये प्रतिवर्ष गठित जांच कमेटी के सदस्य डॉ एपीएस चौहान, डॉ ए. के. हल्वे, डॉ एस. के. गुप्ता, डॉ एस. के. सिंह, डॉ सी.पी. शिन्दे, डॉ आर.ए. शर्मा, प्रोफेसर अविनाश तिवारी ( वर्तमान कुलगुरू), डॉ के. एस. ठाकुर (राजस्थान के बासवाड़ा के कुलगुरु), ज्योति प्रसाद, डॉ नवनीत गरूड, डॉ सपन पटेल, डॉ एस. के. द्विवेदी, डॉ हेमन्त शर्मा, डॉ राधा तोमर, डॉ आर.पी. पाण्डेय, डॉ एम.के. गुप्ता, डॉ निमिषा जादौन, डॉ सुरेश सचदेवा, डॉ मीना श्रीवास्तव द्वारा असम्यक लाभ प्राप्त कर असत्य आधारों पर उक्त महाविद्यालय के कूटरचित निरीक्षण प्रतिवेदन तैयार कर उक्त महाविद्यालय की संबंद्धता लेने में सहयोग करने से उक्त व्यक्तियों के विरूद्व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का अपराध प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाया जाना दर्शित होता हैं।
जांच दल के सदस्य डॉ एपीएस चौहान की मृत्यु हो जाने से शेष डॉ ए. के. हल्वे, डॉ एस. के. गुप्ता, डॉ एस. के. सिंह, डॉ सी.पी. शिन्दे, डॉ आर.ए. शर्मा प्रोफेसर अविनाश तिवारी, डॉ के. एस. ठाकुर, ज्योति प्रसाद, डॉ नवनीत गरूड, डॉ सपना पटेल, डॉ एस. के. द्विवेदी, डॉ हेमन्त शर्मा, डॉ राधा तोमर, डॉ आर.पी. पाण्डेय, डॉ एम.के. गुप्ता, डॉ निमिषा जादौन, डॉ सुरेश सचदेवा, डॉ मीना श्रीवास्तव एवं अन्य के विरूद्व भा.द.वि एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 संशोधित अधिनियम 2018 की धारा के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया हैं।

