
रिमांड अवधि में विशाल ने काबूली वारदातें, एसपी ने किया खुलासा
उज्जैन। प्लाट दिलाने का झांसा देकर 10 लाख की धोखाधड़ी करने वाले फर्जी पुलिस अधिकारी को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया था। जिसमें 14 लोगों के साथ धोखाधड़ी की वारदात करना कबूल किया है। सोमवार को एसपी ने मामले का खुलासा किया। अन्य वारदातों का खुलासा होने पर आरोपी को कोर्ट में पेश कर फिर से तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया है।
नागझिरी में रहने वाले निलेश पिता बाबूलाल चौहान ने नवम्बर माह के तीसरे सप्ताह में राघवी थाना पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी कि परिचित के माध्यम से ग्राम जगोटी में रहने वाले विशाल पिता अजय शर्मा से मुलाकात हुई थी। उसने खुद को पुलिस अधिकारी होना बताकर अच्छी कालोनी में प्लाट दिलाने का झांसा दिया और 10 लाख रुपए ले लिये। महिनों बीतने के बाद भी प्लाट नहीं दिलवाया। विशाल के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह फर्जी पुलिस अधिकारी है। पुलिस ने जांच के बाद मामले में विशाल के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरू की थी। 40 दिनों की तलाश के बाद पुलिस ने फर्जी पुलिस अधिकारी विशाल शर्मा को राघवी पुलिस ने सूचना मिलने के बाद उज्जैन रेलवे स्टेशन से हिरासत में ले लिया है। जिसे 2 दिन पहले न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया गया था इस दौरान सामने आया कि उसमें 14 लोगों से करीब 34 लाख से अधिक की धोखाधड़ी खुद को पुलिसकर्मी होना बात कर की है। सोमवार को एसपी प्रदीप शर्मा ने मामले का खुलासा किया। पुलिस ने उसे दोबारा से कोर्ट में पेश कर तीन दिनों की रिमांड अवधि बढ़ाई है।
शाजापुर का बनाया था फर्जी आईडी कार्ड
फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर धोखाधड़ी करने वाले विशाल ने शाजापुर पुलिस का फर्जी आईडी कार्ड बनवा रखा था। उसने शाजापुर और नीमच में भी ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है। जहां उसके खिलाफ मामले दर्ज है। विशाल शर्मा काफी शातिर है। उसके खिलाफ आरक्षक भूपेशसिंह ठाकुर निवासी ढांचा भवन ने भी कुछ माह पहले हाऊसिंग बोर्ड कालोनी शिवांगी परिसर में मकान दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी की थी। विशाल खुद को कभी डीएसपी बताता था तो कभी एसआई। उसने सिंहस्थ 2016 के दौरान होमगार्ड के रूप में अस्थाई तौर पर 4 माह काम किया था। उस दौरान कई पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के संपर्क में आया और पुलिस की कार्यशैली को अपना लिया।
