सोमवार को जैसे ही बिहार विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा हुई, राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई. परंतु इस बार माहौल में एक नया आयाम स्पष्ट दिखाई दे रहा है,महिला मतदाताओं की निर्णायक भूमिका. बिहार की राजनीति में महिलाएं अब मात्र “सहायक मतदाता” नहीं रहीं, बल्कि नीतियों, अभियानों […]

छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से 11 बच्चों की हुई मौत ने पूरे प्रदेश को गहरे सदमे में डाल दिया है. इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि औषधि सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय प्रशासनिक निगरानी में कई गंभीर खामियां हैं. यह […]

गाजा की धरती दशकों से रक्त और राख में लिपटी रही है. हर युद्ध, हर संघर्ष के बाद यह प्रश्न और तीखा होता गया कि आखिर शांति का मार्ग किस ओर है. ऐसे समय में, जब मध्यपूर्व फिर से हिंसा की ज्वाला में झुलस रहा था, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप […]

नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाते हुए संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत का मार्गदर्शक संबोधन प्रस्तुत किया. यह भाषण केवल संघ कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए विचार करने योग्य था. इसमें स्वदेशी से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता से […]

लद्दाख की धरती हमेशा से रणनीतिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक दृष्टि से भारत के लिए अत्यंत संवेदनशील रही है. हिमालय की दुर्गम चोटियों पर बसा यह इलाका न केवल भारत की उत्तरी सुरक्षा कवच का हिस्सा है, बल्कि इसकी सीमाएँ चीन और पाकिस्तान से सटी होने के कारण अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति का […]

भारत लंबे समय तक रक्षा उपकरणों और हथियारों के लिए आयात पर निर्भर रहा है. यह स्थिति न केवल रणनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण थी बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार पर भी बोझ डालती थी. लेकिन पिछले एक दशक में तस्वीर बदलने लगी है. केंद्र सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को […]

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में हाल ही में किए गए सुधारों को लागू हुए चार दिन हो चुके हैं. प्रारंभिक संकेत उत्साहवर्धक हैं—अधिकांश वस्तुओं की कीमतों में गिरावट आई है और आम उपभोक्ता ने राहत की सांस ली है. लेकिन यह तस्वीर पूरी तरह संतुलित नहीं है. कुछ ऐसे […]

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80 वें अधिवेशन में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर का भाषण भारत की बदलती अंतरराष्ट्रीय भूमिका और आत्मविश्वास का प्रतीक बनकर उभरा. यह संबोधन केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि उस भारत का घोषणापत्र था जो अब वैश्विक मंच पर श्रोता नहीं, बल्कि नीति-निर्माता और निर्णायक […]