2023 के विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए कांग्रेस ने की जमावट

विशेष

पीसीसी के पुनर्गठन के साथ ही कांग्रेस में 64 नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए

पुराने और अनुभवी चेहरों पर विश्वास जताया, कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की सूची में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का एकतरफा वर्चस्व

– गुटीय संतुलन गड़बड़ाया लेकिन क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा गया

मिलिंद मुजुमदार

इंदौर : 2023 के विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश कांग्रेस में नए सिरे से जमावट की है। 5 वर्ष पुरानी प्रदेश कांग्रेस कमेटी का पुनर्गठन किया गया है। 64 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। पुनर्गठन की खास बात यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को अपनी कार्यकारिणी गठित करने के लिए आलाकमान ने खुली छूट दी है। यही वजह है कि कांग्रेस में नियुक्ति की यह सूची पूरी तरह से कमलनाथमय है।

कमलनाथ के एकतरफा वर्चस्व के कारण गुटीय संतुलन जरूर गड़बड़ा गया है लेकिन क्षेत्रीय संतुलन का पूरा ध्यान रखा गया है। उपाध्यक्षों और महासचिवों में विंध्य, बघेलखंड, बुंदेलखंड, महाकौशल, ग्वालियर चंबल अंचल, भोपाल ,होशंगाबाद संभाग तथा मालवा निमाड़ का पूरा ध्यान रखा गया है। दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह जैसे नेता शक्तिशाली राजनीतिक प्रबंधन समिति में हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस समिति में कमलनाथ के पुत्र सांसद नकुलनाथ का भी नाम है जबकि दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह, उनके अनुज लक्ष्मण सिंह और भांजे प्रियव्रत सिंह की उपेक्षा की गई है। हालांकि खुद दिग्विजय सिंह को पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी में शामिल किया गया है।

सूची में अधिकांश चेहरे वही हैं, जिन्हें बार-बार पदाधिकारी बनाया गया है। कुछ युवा चेहरे जरूर शामिल किए गए हैं। कमलनाथ को फ्री हैंड देने और उनका वर्चस्व दिखाने के लिए कार्यकारी अध्यक्षों की पिछली व्यवस्था समाप्त कर दी गई हैं। चारों पुराने कार्यकारी अध्यक्षों जीतू पटवारी, सुरेंद्र चौधरी, बाला बच्चन और रामनिवास रावत को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। सूची देखने से पता चलता है कि इसमें अनेक ऐसे नेता हैं जो बार-बार चुनाव हारे हैं या जिन्होंने कोई चुनाव नहीं जीता है।इनके अलावा ऐसे भी नेता हैं जो मैदानी राजनीति से पूरी तरह से दूर हैं। सूची में डॉक्टर विजय लक्ष्मी साधो,रवि जोशी और सत्यनारायण पटेल जैसे नेताओं के नाम नहीं है। संभव है इन्हें राष्ट्रीय कार्यसमिति में मौका मिले।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की 55 उपाध्यक्ष और 105 महासचिवों की जंबो कार्यकारिणी एआईसीसी ने घोषित की है, जिसमें सिंधिया का साथ नहीं देने वाले नेताओं को भी जगह दी गई है तो कुछ समय से उपेक्षित जैसे चल रहे नेता भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से नवाजे गए हैं। अब तक पीसीसी चीफ के बंगले पर बैठने वाली कोर कमेटी के आधा दर्जन नेता तमाम मामलों में विचार विमर्श करते थे, अब राजनीतिक मामलों की 21 नेताओं की कमेटी बनाई है। जिसमें कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह से लेकर पूर्व अध्यक्षों व अन्य वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। प्रदेश की अत्यंत महत्वपूर्ण पॉलीटिकल अफेयर्स कमिटी में मीनाक्षी नटराजन को जगह नहीं मिली है। पीसीसी की कार्यकारिणी में मौजूदा विधायकों में से करीब 90 विधायकों के नाम नहीं हैं। इस सूची के संबंध में प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम सूची नहीं है। इसमें संशोधन भी किया जा सकता है और कुछ नाम जोड़े भी जा सकते हैं।

64 जिला अध्यक्षों में 10 नए नाम

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने रविवार की रात को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की राजनीतिक मामलों की कमेटी सहित 155 उपाध्यक्ष और महासचिवों की सूची जारी की है। इसके साथ ही 64 जिला अध्यक्षों के नामों पर मुहर लगाई है जिनमें से ज्यादातर पहले से ही जिम्मेदारी संभाल रहे थे। 10 जिला अध्यक्षों के नए नाम शामिल हैं। भोपाल शहर व ग्रामीण दोनों के जिला अध्यक्षों के बारे में घोषित टीम में कोई उल्लेख नहीं होने से कयास लगाए जा रहे हैं कि इनके बारे में बाद में कोई फैसला होगा। एआईसीसी की सूची में पीसीसी के संगठन के प्रभारी की जिम्मेदारी के बारे में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

10 जिलों में नहीं थे संगठन के मुखिया

कांग्रेस के करीब 10 जिले ऐसे थे जहां जिला अध्यक्ष नहीं थे। इनमें मुरैना ग्रामीण जिला अध्यक्ष, सागर शहर और ग्रामीण अध्यक्ष, अनूपपुर, रतलाम ग्रामीण और खरगोन में जिला अध्यक्ष के पद रिक्त थे। वहीं बुरहानपुर ,खंडवा दोनों जिलों में शहर और ग्रामीण इकाइयों में कार्यवाहक जिला अध्यक्ष से काम चल रहा था। शहडोल में सुभाष गुप्ता, कटनी शहर में विक्रम खमरिया बतौर कार्यवाहक जिला अध्यक्ष काम कर रहे थे। अब 10 जिलों में नए अध्यक्षों को नियुक्त किया गया है।

राजनीतिक मामलों की कमेटी में 21 नेता

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में राजनीतिक मामलों की 21 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई है। इसमें कमलनाथ सहित दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया, सुरेश पचौरी व अरुण यादव, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा व राजमणि पटेल, लोकसभा सदस्य नकुल नाथ, अब तक कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका संभाल रहे बाला बच्चन, जीतू पटवारी, सुरेंद्र चौधरी व रामनिवास रावत, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदाप्रसाद प्रजापति, विधायकगण सज्जन सिंह वर्मा, आरिफ अकील व कमलेश्वर पटेल, पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा, सेवादल के पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक महेंद्र जोशी व महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा को शामिल किया गया है। इसमें गुटीय संतुलन के हिसाब से कमलनाथ के समर्थक नकुलनाथ, बाला बच्चन, सुरेंद्र चौधरी, सज्जन सिंह वर्मा, कमलेश्वर पटेल हैं तो दिग्विजय सिंह समर्थकों में डॉ. गोविंद सिंह, कांतिलाल भूरिया, आरिफ अकील व रामेश्वर नीखरा हैं और सुरेश पचौरी समर्थकों में महेंद्र जोशी व शोभा ओझा माने जाते हैं। इनके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक रहे रामनिवास रावत को कमेटी में शामिल किया गया है।

चौंकने वाले नाम

एआईसीसी ने 50 उपाध्यक्षों के नामों को हरी झंडी दी है जिसमें अब तक महासचिव की भूमिका में रहे अशोक सिंह, राजीव सिंह, राजकुमार पटेल को इसमें शामिल किया गया है। उपाध्यक्षों में पूर्व आईएएस अजीता बाजपेयी पांडे और वीके बाथम के नाम भी चौंकाने वाले हैं। इसी तरह एआईसीसी की घोषित कमेटी में मानक अग्रवाल, गोविंद गोयल और अर्चना जायसवाल के नाम भी हैं जिनकी लंबे समय से उपेक्षा होती रही है। 105 महासचिवों की जारी सूची में कई वरिष्ठों के साथ नौजवानों को जगह दी गई है।

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