कांग्रेस: मैदानी संघर्ष की तैयारी

अपने इतिहास का सबसे अधिक खराब समय देखने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस आखिरकार मैदानी संघर्ष के लिए लगता है तैयार हो गई है. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने हाल ही में पार्टी की स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि पार्टी पदाधिकारियों को मैदान में उतर कर संघर्ष करना होगा. कांग्रेस में अब दिखावा नहीं चलेगा. जो पदाधिकारी काम नहीं करेंगे उन्हें हटना पड़ेगा. इसी के साथ मल्लिकार्जुन खडग़े ने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की समाप्ति के बाद 26 जनवरी से 1 महीने तक कांग्रेस का हाथ से हाथ जोड़ो अभियान चलेगा. यह अभियान ब्लॉक स्तर तक चलाया जाएगा. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने इस संबंध में जो कुछ भी कहा वह यह दर्शाता है कि पार्टी मैदानी संघर्ष करने की मानसिकता में आ गई है. यह अत्यंत स्वागत योग्य है, क्योंकि कांग्रेस देश की वह पार्टी है, जिसने स्वाधीनता के महान संघर्ष का नेतृत्व किया था. वैसे पार्टी ने अपने तेवर राहुल गांधी की भारत जोड़ो पर यात्रा के जरिए दिखा दिए हैं.

राहुल गांधी 7 सितंबर से पदयात्रा करने निकले हैं. उन्होंने कन्याकुमारी से श्रीनगर तक की लगभग 36 सौ किलोमीटर की दूरी पद यात्रा के जरिए तय करना निश्चित किया है. उनकी पदयात्रा इस समय राजस्थान में निकल रही है.15 जनवरी के लगभग यह पद यात्रा कश्मीर में पहुंचेगी. राहुल गांधी के साथ सैकड़ों यात्री चल रहे हैं. अपनी पदयात्रा के दौरान राहुल विभिन्न क्षेत्रों के किसानों, व्यापारियों, मजदूरों और बुद्धिजीवियों से भी चर्चा कर रहे हैं. उनका यह देशाटन देश को जानने का सबसे गंभीर और उपयोगी प्रयास है. उनकी भारत जोड़ो यात्रा को जनता का जबरदस्त समर्थन भी मिल रहा है. उनकी यात्रा जब मध्य प्रदेश से राजस्थान में प्रवेश करने वाली थी, उसी समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया. उन्होंने कहा कि इस समय राहुल दक्षिण से उत्तर की ओर यात्रा कर रहे हैं. इस यात्रा की समाप्ति के बाद राहुल गांधी एक और पदयात्रा करेंगे जो पश्चिम से पूर्व की ओर होगी. यानी एक तरह से राहुल गांधी पूरे भारत की परिक्रमा करने वाले हैं. यदि ऐसा होता है, तो यह अत्यंत स्वागत योग्य होगा क्योंकि इससे राहुल को देश की समस्याओं के बारे में ग्रास रूट लेवल से जानकारी मिलेगी. कांग्रेस पार्टी में भी इससे मजबूती आएगी. आम कार्यकर्ता को लगेगा कि जब राहुल गांधी जैसे उनके सर्वोच्च नेता पदयात्रा कर जनता से जमीनी तौर पर जुड़ सकते हैं, तो उन्हें भी मैदान में उतरकर संघर्ष करना पड़ेगा. कांग्रेस का मजबूत होना आखिरकार देश के लोकतंत्र को ही मजबूत करेगा. इस समय देश को अखिल भारतीय स्तर की पार्टियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता है. क्षेत्रीय वाद अंतत: देश की अखंडता की दृष्टि से ठीक नहीं साबित होता.

बहरहाल, राजनीति में जनता के बीच विश्वास कायम करने का एकमात्र तरीका यही है कि बुनियादी समस्याओं को लेकर जनता के बीच जाया जाए और संघर्ष किया जाए. यदि कांग्रेस इमानदारी से ऐसा करती है और उसके कार्यकर्ता ग्राम पंचायत स्तर तक संघर्ष करने का माद्दा रखते हैं तो निश्चित ही आने वाले दिनों में पार्टी फिर से अपने आप को स्थापित कर सकती है.

नव भारत न्यूज

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