नयी दिल्ली, 07 नवंबर (वार्ता) कर्नाटक सरकार द्वारा ई20 ईंधनों में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक पाए जाने के दावों के बाद अब केंद्र ने राज्य सरकार के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों तेल विपणन कंपनियों द्वारा आपूर्ति किया जाना वाला ई20 ईंधन मानकों पर पूरी तरह खरा है।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले और विधिक माप विज्ञान विभाग के उस दावे पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें कहा गया था कि राज्य के कुछ खुदरा केंद्रों पर बेचे जाने वाले पेट्रोल में 26 प्रतिशत से 31 प्रतिशत तक इथेनॉल है। विभाग ने अक्टूबर 2026 में लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच के आधार पर यह दावा किया था।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए 893 नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए। कर्नाटक में परीक्षण किए गए सभी 56 नमूने भी आईएस 17021 की विशेषताओं के अनुरूप हैं, जिनमें इथेनॉल की मात्रा 19 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच है। उसने कहा है कि कर्नाटक में अक्टूबर में किए गए परीक्षण में प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि ये दावे निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं के अनुसार की गई जांच से मेल नहीं खाते।
इसमें कहा गया है कि ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (आपूर्ति, वितरण का विनियमन और कदाचार की रोकथाम) आदेश, 2005’ और ‘विपणन अनुशासन दिशानिर्देश (एमडीजी) 2024’ में नमूना लेने, नमूनों को सुरक्षित रखने, परीक्षण और परिणामों की जानकारी देने के लिए एक तय प्रक्रिया बताई गई है।
इस निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, एक-एक लीटर के छह नमूने लिए जाने चाहिए। इनमें से दो नमूने डीलर को रसीद (पावती) लेने के बाद सौंप दिए जाते हैं, दो नमूने तेल कंपनी या विभाग अपने पास सुरक्षित रखता है, और बाकी दो नमूने ‘नियंत्रण आदेश’ की अनुसूची III में बताई गई या सरकारी गजट में अधिसूचित किसी प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं। नमूनों के लेबल पर सभी संबंधित पक्षों के संयुक्त हस्ताक्षर होने चाहिए, और टेस्टिंग के परिणाम एक तय समय-सीमा के भीतर डीलर और तेल कंपनी को बता दिए जाने चाहिए।
सितंबर 2026 की प्रक्रिया के दौरान लिए गए नमूनों को राज्य स्तरीय समन्वयक के माध्यम से तय की गई तेल विपणन कंपनियों की प्रयोगशालाओं में भेजा गया था, जहां एमडीजी 2024 के तहत जरूरी गुणवत्ता मानकों के लिए उनका परीक्षण किया गया। वहीं, अक्टूबर की प्रक्रिया में लिए गए नमूनों के मामले में ओएमसी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी नहीं थी। ओएमसी ने राज्य स्तरीय समन्वयक से संपर्क करके इन नमूनों, आउटलेट-दर-आउटलेट पूरी जानकारी और प्रयोगशाला रिपोर्ट की मांग की थी, लेकिन उन्हें ये चीजें नहीं मिलीं।
मंत्रालय के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों का यह भी कहना है कि सामने आए नतीजे ‘नियंत्रण आदेश’ के तहत तय की गई प्रयोगशाला में किए गए परीक्षण पर नहीं, बल्कि किसी तीसरे पक्ष की प्रयोगशाला द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्रों पर आधारित हैं। इन प्रमाणपत्रों में ऐसी पूरी तकनीकी जानकारी नहीं है, जिससे बताए गए इथेनॉल की मात्रा की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके। साथ ही, संबंधित नमूने और जरूरी दस्तावेज न होने की वजह से, तेल विपणन कंपनियों और संबंधित डीलरों को इन नतीजों की पुष्टि करने या दोबारा परीक्षण कराने का मौका भी नहीं मिल पाया।
केंद्र सरकार ने परीक्षण की तकनीक और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि गैस क्रोमैटोग्राफी परीक्षण में ई20 के लिए तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कर्नाटक की रिपोर्ट में बताए गए ईंधन के घनत्व के आधार पर रिपोर्ट की वैधता को चुनौती दी गई है।
