रेवांचल एक्सप्रेस के AC कोच में नशे में धुत पुलिसकर्मी का बवाल, यात्री से मारपीट और ट्रेन से फेंकने की धमकी

भोपाल। रानी कमलापति-रीवा एक्सप्रेस (रेवांचल) में नशे की हालत में सवार पुलिसकर्मी ने जमकर गदर मचाया. शराब की गंध आने पर जब यात्रियों ने उसे टोका तो मारपीट शुरू कर दी. इतना ही नहीं, एक यात्री के साथ मारपीट करते-करते उसे चलती ट्रेन से फेंकने की धमकी दी. युवक को चोट लगी है. हैरानी की बात यह है कि पीडि़त ने विदिशा स्टेशन पर आरपीएफ जवानों को घटना बताई, लेकिन उन्होंने मदद करने के बजाय संबंधित पुलिसकर्मी को अपने साथ ले गए. सतना पहुंचकर पीडि़त ने मामला दर्ज कराया. केस डायरी आगे की जांच के लिए जीआरपी भोपाल आई है.

जीआरपी भोपाल में दर्ज शिकायत के मुताबिक, सीधी निवासी वकील अभिनव सिंह परिहार (28) एक नवंबर को ट्रेन नंबर-12125 रानी कमलापति-रीवा एक्सप्रेस के ए-2 कोच में बर्थ नंबर-48 पर सफर कर रहे थे. भोपाल स्टेशन निकलने के बाद उनकी सीट के पास पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति बैठा था. उसकी वर्दी पर सी-827 योगेश कुमार लिखा था और कंधे पर मध्यप्रदेश पुलिस का बैज लगा था. अभिनव ने उससे बर्थ के बारे में पूछा तो उसने जवाब दिया कि वह मध्यप्रदेश पुलिस में है और उसका कोई टिकट नहीं लगता. यात्री ने मुंह से शराब की गंध आने की बात कहकर उसे दूसरी जगह बैठने को कहा. इस पर वह भड़क गया और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी. हमले में अभिनव की बाईं भौंह के ऊपर और गले में चोट आई, जबकि नाखून से खरोंच भी आई. पीडि़त की शिकायत पर जीआरपी सतना में शून्य अपराध दर्ज किया गया. बाद में डायरी भोपाल जीआरपी पहुंची, जहां 4 नवंबर को संबंधित धाराओं में असल अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई.

आरपीएफ ने आरोपी से निभाई यारी

ट्रेन में मारपीट और जान से मारने की धमकी झेलने के बाद अभिनव ने विदिशा स्टेशन पर आरपीएफ जवानों से मदद मांगी थी. पीडि़त के मुताबिक, उसने जवानों को पूरी घटना बताई और पुलिसकर्मी के शराब के नशे में होने की बात भी कही. लेकिन मदद मिलने के बजाय आरपीएफ जवान उसी पुलिसकर्मी को अपने साथ ले गए. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आरपीएफ ने पीडि़त की शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या आरोपी पुलिसकर्मी होने के कारण उसे बचाया गया? इतना ही नहीं आरपीएफ ने यात्री की चोटों को भी नजर अंदाज किया. उसका बयान तक दर्ज नहीं किया गया. आरोपी को ही संरक्षण दिया गया.

बिना टिकट ट्रेन में बैठा पुलिसकर्मी 

पुलिसकर्मी बिना टिकट यात्रा कर रहा था. उसने खुद को मध्यप्रदेश पुलिस में पदस्थ बताते हुए दावा किया कि पुलिसकर्मियों को ट्रेन में सफर करने के लिए टिकट की जरूरत नहीं होती. यात्रियों ने जब उसे दूसरी जगह बैठने के लिए कहा तो वह पुलिसिया रौब दिखाने लगा और गाली-गलौज शुरू कर दी. यात्रियों के विरोध करने पर वह मारपीट पर उतारू हो गया. जीआरपी अब संबंधित वर्दीधारी की पहचान और उसकी यात्रा की वैधता की जांच में जुटी है.

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