सच्चिदानंद सिन्हा की 155वीं जयंती के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल होंगे

नयी दिल्ली, 7 नवंबर (वार्ता) संविधान सभा के अंतरिम अध्यक्ष एवं आधुनिक बिहार के निर्माता कहे जाने वाले डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा की 155वीं जयंती 10 नवंबर, के अवसर पर यहां आयोजित होने वाले समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल अता हसनैन होंगे, जबकि लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।

आयोजन समिति के सचिव और पूर्व आईपीएस अधिकारी उदय सहाय ने बताया कि डॉ. सिन्हा न केवल एक प्रख्यात संविधानविद् थे, बल्कि उच्च कोटि के पत्रकार, प्रखर लेखक, कुशल वक्ता, समाज सुधारक, पुस्तकालय आंदोलन के प्रणेता और गहरे संगीत प्रेमी भी थे। वे बिहार-उड़ीसा के पहले वित्त मंत्री भी रहे और उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत द्वारा दी जाने वाली ‘सर’ की उपाधि लेने से इनकार कर दिया था। आयोजकों का मानना है कि ऐसी महान विभूति को उनके निधन के 75 साल बाद इतने बड़े पैमाने पर याद किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य नयी पीढ़ी को उनके अमूल्य योगदान से परिचित कराना है।

इस अवसर पर ‘ह्यूमन्स इन लूप्स’ के चर्चित युवा निर्देशक अरण्य सिंह द्वारा डॉ. सिन्हा के जीवन पर निर्मित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म दिखायी जाएगी। इसकी पटकथा श्री सहाय ने लिखी है और निर्माण डॉक्टर सिन्हा के परिवार से जुड़े ग्रुप कैप्टन राकेश रंजन ने किया है। प्रख्यात नृत्यांगना शोभना नारायण अपने भावपूर्ण नृत्य के माध्यम से डॉ. सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी। इस अवसर पर एक फोटो प्रदर्शनी भी लगायी जायेगी और आधुनिक भारत के निर्माण में डॉ. सिन्हा के योगदान पर एक उच्च-स्तरीय परिचर्चा होगी।

आयोजन समिति के अनुसार बिहार के आरा शहर में दस नवंबर 1871 को जन्मे डॉक्टर सिन्हा लंदन में महात्मा गांधी के सहपाठी तथा मोतीलाल नेहरू के मित्र थे। उनके अथक प्रयासों से 1911 के दिल्ली दरबार में बिहार राज्य के गठन की घोषणा हुई थी। वे संविधान सभा के वरिष्ठतम सदस्य होने के नाते इसके अंतरिम अध्यक्ष बनाये गये थे।

.....

Next Post

100 साल पहले ऐसा था ओंकारेश्वर; न कंक्रीट का जाल था, न झूला पुल, केवल पत्थरों से बहती नर्मदा बनाती थी 'ॐ' की प्राकृतिक आकृति

Sat Nov 7 , 2026
ओंकारेश्वर, आज से ठीक 100 वर्ष पूर्व यानी 1920 के दशक में, प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और पवित्र ओमकार पर्वत (मान्धाता द्वीप) आज की तुलना में कहीं अधिक प्राकृतिक, शांत, दुर्गम और अलौकिक दिखाई देता था। उस दौर में यहाँ न तो आधुनिक कंक्रीट के निर्माण थे, न बड़े पुल और […]

You May Like