नयी दिल्ली, 7 नवंबर (वार्ता) रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे पर पुराने और फर्जी वीडियो वायरल किये जाने के मामलों पर शनिवार को कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे बहुत से वीडियो की पहचान की गयी है और ऐसे लोगों को खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करायी जाएगी।
श्री वैष्णव के पास सूचना प्रसारण , इलेक्ट्रानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) की भी जिम्मेदारी है।
श्री वैष्णव ने यहां एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से अलग से बातचीत में कहा, ”आप जानते हैं कि सोशल मीडिया मंचों पर फर्जी वीडियो जारी करना कितना घातक है, इसके क्या-क्या परिणाम हो सकते हैं। मामलों में एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज करायी जा रही हैं।” रेलवे के अनुसार पिछले कुछ समय में ऐसे 70 से अधिक वीडियो की पहचान की गयी है जो या तो पुराने हैं या फर्जी हैं। ऐसे मामलों में रेलवे ने कार्रवाई शुरू की है।
रेल मंत्री ने कहा कि एक दशक में रेलवे के काम काज में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस दौरान यात्री सेवाओं में बड़ा फर्क आया है और बुनियादी ढांचे का तीव्र विकास हुआ है लेकिन कुछ लोग भारतीय रेल और सरकार को बदनाम करने के लिए फर्जी वीडियों को वायल जैसी हरकतों का सहारा लेते हैं।
श्री वैषणव ने कहा कि अनारक्षित टिकटों और अन्य सेवाओं के लिए “रेलवन” के अब तक 6 करोड़ से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षित ट्रेनों के लिए रेल-यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) में सुधारों को लागू करने का काम तेजी से चल रहा है और उम्मीद है कि आगमी जनवरी तक सभी ट्रेनों को इसके अंतर्गत ला दिया जाएगा। उसके बाद इसमें नयी फीचर भी चालू हो जाएंगे।
यह कार्यक्रम श्री वैष्णव द्वारा रेलवे में सुधार की व्यापक योजना का हिस्सा है। सुधारों के साथ नयी प्रणाली अपनी बढ़ी क्षमताओं, अधिक तेज गति और फीचर के साथ यात्रियों के लिए बहुत अनुकूल होगी।
मौजूदा पीआरएस प्रणाली 1980 के दशक में लागू की गयी थी। रेलमंत्री ने कहा, ”40 साल पुरानी प्रणाली की जगह नयी प्रणाली लागू की जानी है और यह बदलाव लोगों के लिए बिना किसी व्यवधान और अव्यवस्था के ट्रेन-दर-ट्रेन किया जा रहा है। अब तक 2800 ट्रेनों को नयी प्रणाली से जोड़ने का काम सहजता से किया जा चुका है और किसी को कोई पता नहीं चला है। जनवरी तक इसमें सभी आरक्षित ट्रेनों के जुड़ जाने की उम्मीद है। इसके बाद इसमें नये फीचर भी दिखने लगेंगे।”
उल्लेखनीय है कि रेलवे ने पीआरएस में सुधार के जरिए प्रणाली की बुकिंग क्षमता में वृद्धि की है। नयी प्रणाली में 10 अंकों वाली पीएनआर श्रृंखला को क्षेत्रीय डेटाबेस की जगह 1, 3, 5 या 7 से शुरू होने वाले अंकों पर आधारित की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रतीक्षारत सूची के टिकटों के कनफर्म होने के पूर्वानुमान दिखाये जाने की सुविधा भी दी जा रही है।
चीन की ओर से आपूर्ति की पाबंदियों के कारण रेल परियोजनाओं के लिए सुरंग बोरिंग ( खुदाई) मशीनों (टीबीएम) की उपलब्धता में दिक्कत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि टीबीएम बनाने के लिए देश में पूरा पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारत में कार्यरत जर्मनी की कंपनी हेरेनकनेक्ट अब 8 मीटर व्यास की टीबीएम बनाने लगी है। इसके लिए कल पुर्जे विशाखापत्तनम, पुणे और देश के अन्य औद्योगिक केंद्रों के कारखानों से लिए जा रहे है। कंपनी 15 और उससे अधिक व्यास की सुरंगों की खुदाई की मशीनों का भी निर्माण करेगी।
रेल मंत्री ने कहा, ”आज का विनिर्माण उद्योग 100 साल पहले जैसा नहीं है कि हर चीज एक ही जगह बनायी जाए। कंपनियां टीयर1, टीयर2, टीयर3 वेंडरों (आपूर्तिकर्ताओं ) से हिस्से-पुर्जे बनवा कर उत्पाद तैयार करती है। यह हर जगह हो रहा है।”
उन्होंने कहा कि जर्मनी की यह कंपनी भारत में रिपेयर कारखाने के साथ शुरुआत कर आज पूरी टीबीएम बना रही है। यह भारतीय इकाई ही कही जाएगी। इसे भारत में चार साल से आमंत्रित किया जा रहा था।
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