
ग्वालियर। ग्वालियर में दीपावली कल रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। पंचांग गणना के अनुसार इस दिन गृहस्थ परिवारों के लिए शाम 5:54 बजे से रात 7:51 बजे तक लक्ष्मी पूजन का मुख्य शुभ मुहूर्त रहेगा। इसकी कुल अवधि एक घंटा 57 मिनट है। इस दौरान प्रदोष काल के साथ वृषभ स्थिर लग्न का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन करना सुख-समृद्धि और धन-धान्य की स्थिरता के लिए शुभ माना जाता है।
प्रदोष काल में स्थिर लग्न का संयोग
दीपावली पर ग्वालियर में प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:07 बजे तक रहेगा। वहीं वृषभ स्थिर लग्न शाम 5:54 बजे से रात 7:51 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस प्रकार वृषभ लग्न का पूरा समय प्रदोष काल के भीतर आ रहा है। यही कारण है कि गृहस्थ परिवारों के लिए इस अवधि को लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष समय माना गया है। धार्मिक परंपरा में प्रदोष काल को दीपावली पूजन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश का पूजन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
व्यापारियों के लिए बही-खाता पूजन
दीपावली व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भी विशेष महत्व रखती है। इस दिन दुकानों, कार्यालयों और व्यावसायिक संस्थानों में लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ नई बही-खातों, लेखनी और तिजोरी की पूजा की जाती है। व्यापारी वर्ग नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत और कारोबार में उन्नति की कामना के साथ बही-खातों का पूजन करता है। दोपहर में शुभ चौघड़िया और उपलब्ध स्थिर लग्न के अनुसार प्रतिष्ठानों में पूजन किया जा सकता है। इसके अलावा शाम का मुख्य प्रदोष एवं वृषभ लग्न मुहूर्त भी पूजन के लिए उपयुक्त है।
निशीथ काल में विशेष साधना
दीपावली की रात्रि में निशीथ काल का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। ग्वालियर में निशीथ काल रात 11:35 बजे से 12:27 बजे तक रहेगा। तंत्र साधना, विशेष मंत्र-जप और रात्रिकालीन अनुष्ठान करने वाले साधक इस अवधि को महत्वपूर्ण मानते हैं। सिंह लग्न का समय लगभग रात 12:25 बजे से अगले दिन सुबह 2:39 बजे तक रहेगा। इस प्रकार निशीथ काल के अंतिम कुछ मिनटों में सिंह लग्न का संयोग बनेगा। सामान्य गृहस्थ परिवारों के लिए शाम का प्रदोष काल और वृषभ स्थिर लग्न ही मुख्य लक्ष्मी पूजन का समय रहेगा।
ऐसे करें मां लक्ष्मी और गणेश का पूजन
दीपावली की पूजा विधि सरल होने के साथ श्रद्धा और स्वच्छता का विशेष महत्व रखती है। सबसे पहले घर के पूजा स्थल अथवा ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं अथवा चित्र स्थापित करें। परंपरा के अनुसार मां लक्ष्मी को भगवान गणेश के दाहिनी ओर स्थान दिया जाता है। पूजा में सरस्वती जी का स्मरण और पूजन भी किया जा सकता है।
पूजन सामग्री में कुमकुम, हल्दी, अक्षत, रोली, कलावा, पुष्प, धूप, दीप, फल, मिठाई, खील-बताशे और नैवेद्य रखें। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश की वंदना और संकल्प के साथ करें। इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान कर उन्हें पुष्प, विशेषकर कमल अथवा गुलाब अर्पित करें। श्रद्धानुसार लक्ष्मी मंत्रों का जाप करें। कलश पूजन के बाद घर की तिजोरी, धन रखने के स्थान, बही-खातों और लेखनी का भी पूजन करें। अंत में घी अथवा तेल के दीपक जलाकर लक्ष्मी-गणेश की आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
दीपों से जगमग होंगे घर और प्रतिष्ठान
दीपावली पर घरों के मुख्य द्वार, खिड़कियों, आंगन और पूजा स्थल को दीपों से सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि प्रकाश और स्वच्छता से परिपूर्ण वातावरण सकारात्मकता का संदेश देता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर शुभकामनाएं देते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। दीपावली का वास्तविक संदेश केवल धन और वैभव तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में सद्भाव, सेवा, ज्ञान और मानवीय मूल्यों का प्रकाश फैलाना भी है।
ग्वालियर में दीपावली के प्रमुख मुहूर्त
दीपावली : रविवार, 8 नवंबर
प्रदोष काल : शाम 5:31 से रात 8:07 बजे तक
मुख्य लक्ष्मी पूजन : शाम 5:54 से रात 7:51 बजे तक
वृषभ स्थिर लग्न : शाम 5:54 से रात 7:51 बजे तक
निशीथ काल : रात 11:35 से 12:27 बजे तक
सिंह लग्न : रात 12:25 से सुबह 2:39 बजे तक
नवभारत के सुधि पाठकों के लिए विशेष सूचना – सभी समय ग्वालियर के स्थानीय समय पर आधारित पंचांग गणना के अनुसार हैं। विभिन्न पंचांगों में गणना पद्धति के कारण कुछ मिनटों का अंतर संभव है
