धनतेरस 2026 पर सोने-चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट, अंतरराष्ट्रीय दबाव, मुनाफावसूली और डॉलर इंडेक्स सहित जानें 5 बड़ी वजहें

नई दिल्ली, इस साल धनतेरस के पावन अवसर पर सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने हर किसी को हैरान कर दिया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, धनतेरस के दिन 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के दाम 3,106 रुपये घटकर करीब 1.41 लाख रुपये पर आ गए, जबकि एक किलो चांदी का भाव 5,437 रुपये की गिरावट के साथ 1.81 लाख रुपये पर दर्ज किया गया। जानकारों के अनुसार, इस मंदी के पीछे वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार (Comex) में आया करेक्शन, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव और पिछले रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच चुके दामों के बाद बड़े ट्रेडर्स द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली मुख्य वजह रही है।

रुपये की स्थिति, आयात लागत और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों का असर, MCX पर वायदा भाव टूटने से ग्राहकों को मिली बड़ी राहत

सोना-चांदी सस्ता होने के पीछे भारतीय रुपये की स्थिति और आयात लागत का भी बड़ा हाथ है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना-चांदी आयात करता है, और वैश्विक आर्थिक तथा राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपये के उतार-चढ़ाव ने कमोडिटी मार्केट की चाल को प्रभावित किया है। हालांकि सरकार द्वारा पूर्व में बढ़ाए गए आयात शुल्क और टैक्स का दबाव बना हुआ था, लेकिन वैश्विक बाजारों में कीमतों में आई अचानक गिरावट ने वायदा बाजार (MCX) और हाजिर भावों को नीचे खींच लिया, जिससे इस त्योहारी सीजन में ग्राहकों को खरीदारी के दौरान कुछ राहत जरूर मिली है।

महंगे दामों से उबरे उपभोक्ताओं का बदला रुख, भारी गहनों के बजाय हल्के वजन के आभूषणों और सिक्कों की खरीद को प्राथमिकता

कीमतों में रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद आई इस आंशिक नरमी के बावजूद इस बार ग्राहकों का खरीदारी का पैटर्न बदला हुआ नजर आया। कल्याण ज्वैलर्स के कार्यकारी निदेशक रमेश कल्याणरमन के अनुसार, धनतेरस पर 22 कैरेट सोने की कीमतें घटकर 13,150 रुपये प्रति ग्राम पर आ गईं। ऊंचे दामों के शुरुआती झटकों के कारण उपभोक्ताओं ने भारी-भरकम पारंपरिक गहनों की जगह हल्के वजन के आभूषणों, चांदी के सिक्कों और बजट के अनुकूल अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी को ज्यादा प्राथमिकता दी, जिससे बाजार में नए ट्रेंड्स देखने को मिले।

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