प्रदूषण पर सरकार के दावों को नेहा बोरा ने घेरा, कहा- आंकड़ों की हकीकत कुछ और

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में दिवाली से पहले ही प्रदूषण का स्तर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार दर्ज होने के बीच शुक्रवार को ‘दिल्ली इज चोकिंग’ अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शोधकर्ताओं और छात्र संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने दिल्ली की जहरीली हवा को लेकर चिंता जताई और सरकारों की जवाबदेही पर सवाल उठाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वॉरियर मॉम्स की भावरीन खंडारी, पर्यावरण शोधकर्ता शौत्रिक घोषस्वामी, दिल्ली साइंस फोरम के रघुनंदन डी, स्टूडेंट एक्टिविस्ट अंजली, जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष के. गोपिका और सोशल एक्टिविस्ट अर्सलान आजाद समेत कई लोग मौजूद रहे।

इस दौरान नेहा बोरा ने नवभारत से बातचीत में आरोप लगाया कि प्रदूषण के मुद्दे पर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जब प्रदूषण पर किए गए कामों का हिसाब देती है, तो अच्छे वायु गुणवत्ता वाले दिनों के आंकड़े सामने रखे जाते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति इन दावों से अलग है।

नेहा बोरा ने सरकार के 220 अच्छे वायु गुणवत्ता वाले दिनों के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन आंकड़ों में शामिल कई दिन अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं। उन्होंने औद्योगिक प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि देश के 78 प्रतिशत थर्मल पावर प्लांट्स को सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) उत्सर्जन मानकों से छूट दी गई है।

उन्होंने निजी वाहनों से होने वाले प्रदूषण, औद्योगिक इकाइयों और कचरा निस्तारण की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रदूषण के लिए केवल पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय दिल्ली सरकार को भी अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।

वहीं, पर्यावरण शोधकर्ता और एक्टिविस्ट शौत्रिक घोषस्वामी ने मौजूदा हालात को संस्थागत विफलता बताया। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले ही दिल्ली का AQI 400 के पार पहुंचना चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है।

सरकार बदलने के बावजूद प्रदूषण की स्थिति में खास सुधार नहीं होने पर उन्होंने सवाल उठाया। घोषस्वामी ने कहा कि पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी और अब दिल्ली तथा केंद्र दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, लेकिन उनके मुताबिक जमीन पर स्थिति में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा। उन्होंने इस व्यवस्था पर तंज कसते हुए इसे ‘ट्रिपल इंजन की सरकार’ बताया।
ग्रीन पटाखों को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए। घोषस्वामी ने कहा कि पिछले साल ग्रीन पटाखों की अनुमति के बावजूद प्रदूषण नियंत्रित होने का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया। इसके बावजूद इस साल भी इन्हें अनुमति दी गई है। उन्होंने आशंका जताई कि दिवाली के बाद राजधानी में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण केवल मौसमी समस्या नहीं है। निजी वाहनों का बढ़ता इस्तेमाल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा प्रबंधन और नियमों का कमजोर क्रियान्वयन भी इसके प्रमुख मुद्दे हैं। उनका कहना था कि इन सभी मोर्चों पर ठोस कदम उठाए बिना दिल्ली को प्रदूषण से राहत मिलना मुश्किल है।

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