जबलपुर: शहर में पेयजल की शुद्धता और पाइपलाइनों की स्थिति को लेकर नगर निगम तथा नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के दावे आमने-सामने आ गए हैं। नगर निगम, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में रिपोर्ट प्रस्तुत कर दावा किया है कि जबलपुर में पेयजल की पाइपलाइनें नालों-नालियों से होकर नहीं गुजर रही हैं और नागरिकों को शुद्ध पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके विपरीत याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मंच ने समिति की रिपोर्ट को गलत बताते हुए उस पर आपत्ति जताई है।
एनजीटी के सेंट्रल जोन में न्यायिक सदस्य शेख कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता डा. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव को संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर लिखित आपत्तियां प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। मामले की अगली सुनवाई आठ जनवरी, 2027 को निर्धारित की गई है।
60 प्रतिशत पाइपलाइन नालों से गुजरने का आरोप
नागरिक उपभोक्ता मंच की याचिका में दावा किया गया है कि शहर की लगभग 60 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइनें नालों और नालियों से होकर गुजर रही हैं। इनमें से कई पाइपलाइनें 40 से 50 वर्ष पुरानी हैं और जगह-जगह लीकेज होने से पेयजल दूषित होने की आशंका बनी रहती है। इसी शिकायत के आधार पर एनजीटी ने नगर निगम, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति गठित कर 30 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
रिपोर्ट को बताया गलत, अब जवाबी आपत्तियों का मौका
संयुक्त समिति ने एक नवंबर 2026 को एनजीटी में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें पाइपलाइनों के नालों-नालियों से गुजरने की बात को खारिज करते हुए पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता संतोषजनक बताई गई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रभात यादव ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए उसे गलत और वास्तविक स्थिति से परे बताया। इस पर पीठ ने याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट के विरुद्ध तथ्यात्मक आपत्तियां प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मंच अपनी आपत्तियों में किन स्थानों, पाइपलाइनों और लीकेज के साक्ष्यों के आधार पर संयुक्त समिति की रिपोर्ट को चुनौती देता है। इससे शहर की पेयजल व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर भी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आ सकेंगे।
