जबलपुर: पुलिस के द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने पाया कि आरोपी युवक के खिलाफ दर्ज की गयी एफआईआर में उसकी गिरफ्तारी के समय का उल्लेख किया गया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद की गयी गिरफ्तारी अवैध नहीं है।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में कहा गया था कि गजराज भट्ट तथा चचेरा भाई साहूकार भट्ट जीवन यापन के लिए फल का कारोबार करते हैं। एक महिला व उसके दो साथियों ने 12 अक्टूबर 2026 को उनके भाईयों के साथ मारपीट की थी। जिसके बाद दोनों पक्ष अशोका गार्डन थाने पहुंचे थे। महिला ने उसके खिलाफ थाने में शिकायत की थी।
इसके बाद पुलिस ने उसके भाई गजराज के खिलाफ बलात्कार व एसटीएससी एक्ट के तहत कार्यवाही किये जाने के संबंध में जानकारी दी परंतु एफआईआर की प्रति, गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश उपलब्ध नहीं कराया। याचिका में कहा गया था कि पुलिस के द्वारा उसके भाई को अवैध अभिरक्षा में रखा गया है। नियमानुसार उसके भाई को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिये था।षासन की तरफ से पेश की तरफ पुलिस द्वारा दर्ज की गयी एफआईआर का प्रति पेष करने हुए बताया गया कि उसके गिरफतारी का समय भी अंकित है।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि गिरफ्तारी की वास्तविक तारीख, समय और स्थान से जुड़े विवादित तथ्यों की जांच इस रिट याचिका में नहीं की जा सकती। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित मुददे ट्रायल कोर्ट के समक्ष उठाने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका को निरस्त कर दिया।
