
भोपाल। भाजपा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा है कि मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने का दावा गलत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि एसआईआर कोई नई प्रक्रिया नहीं है। आजादी के बाद देश में 12 बार यह प्रक्रिया अपनाई गई, जिनमें 10 बार कांग्रेस शासनकाल में हुई। भाजपा के शासनकाल में दो बार एसआईआर कराया गया।
गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता में खण्डेलवाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एसआईआर के आंकड़ों को गलत तरीके से प्रस्तुत कर देश में भ्रम और अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए मृत, डुप्लीकेट, स्थायी रूप से स्थानांतरित और अपात्र मतदाताओं के नामों का सत्यापन जरूरी है। पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखते हुए अपात्र नाम हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था की आवश्यकता है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विमर्श के लिए संसद का मंच निर्धारित है, लेकिन राहुल गांधी सदन में बहस करने के बजाय हंगामा करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई है तो कांग्रेस किसी ऐसे वैध मतदाता का प्रमाण क्यों नहीं देती, जिसका नाम गलत तरीके से हटाया गया हो। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार का आत्ममंथन करने के बजाय निर्वाचन आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगा रही है।
एसआईआर के आंकड़ों पर भाजपा का दावा
प्रेम शुक्ला ने बताया कि मतदाता सूची के सत्यापन में करीब 6.3 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर जा चुके पाए गए। लगभग तीन करोड़ मतदाता तीन बार नोटिस देने के बावजूद पते पर नहीं मिले, जबकि करीब 2.5 करोड़ मृत और एक करोड़ डुप्लीकेट नाम दर्ज थे। इनका सत्यापन कर सूची को दुरुस्त करने की कार्रवाई की गई है।
उन्होंने दावा किया कि मध्यप्रदेश में करीब 2.7 लाख डुप्लीकेट और 8.46 लाख मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। शुक्ला ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में बीएलओ के साथ सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट भी शामिल होते हैं और मतदाता सूची को लेकर आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार सभी को है।
जिलों तक पहुंचाया जाएगा अभियान
खण्डेलवाल ने कहा कि विपक्ष की कथित नकारात्मक राजनीति के खिलाफ भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत इंदौर, जबलपुर और भोपाल में पदयात्राएं निकाली जा चुकी हैं। अब इसे प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इन पदयात्राओं में डॉक्टर, वकील, सामाजिक संगठनों और अल्पसंख्यक समाज सहित विभिन्न वर्गों के लोगों ने भागीदारी की है।
