भारत की अध्यक्षता में हीरा व्यापार पर किंबरले प्रासेस की इस माह नयी दिल्ली में होने वाली पूर्ण बैठक की तैयारियां जोरो पर

नयी दिल्ली, 05 नवंबर (वार्ता) गृहयुद्ध से प्रभावित अफ्रीकी देशों के हीरे के अवैध अंतराष्ट्रीय व्यापार पर अंकुश के लिए किंबरले प्रोसेस (केपी) के नाम से स्थापित वैश्विक व्यवस्था के सदस्य देशों का पूर्व अधिवेशन ( केपी प्लेनरी) भारत की मेजबानी में 30 नवंबर से 4 दिसंबर तक यहां ‘भारत मंडपम’ में होगा।

इसकी तैयारियों के सिलसिले में भारत की अध्यक्षता में 3 नवंबर को अंगोला के लुआंडा में एक परामर्श बैठक आयोजित की गयी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की गुरुवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार वाणिज्य विभाग के अपर सचिव यशवीर सिंह की अध्यक्षता में लुआंडा की बैठक में वैश्विक हीरा उद्योग से जुड़ी प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। इनमें कच्चे हीरों की जिम्मेदार सोर्सिंग, संस्थागत प्रशासन, नियमों का पालन और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना जैसे विषय शामिल थे।

इस बैठक में केपी कार्यकारी समूह और समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, केपी के उपाध्यक्ष (घाना ), और केपी के पूर्व अध्यक्ष संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधियों के अलावा वर्ल्ड डायमंड काउंसिल, केपी सिविल सोसाइटी कोएलिशन, डायमंड डेवलपमेंट इनिशिएटिव (डीडीआई) और अफ्रीकन डायमंड प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (एडीपीए) जैसे पर्यवेक्षक और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

विज्ञप्ति के अनुसार परामर्श के लिए आयोजित यह बैठक 30 नवंबर से 4 दिसंबर तक नई दिल्ली में होने वाली केपी प्लेनरी’ (पूर्ण सत्र) से पहले भारत की तैयारियों का हिस्सा थी। यह परामर्श बैठक लुआंडा में 3-4 नवंबर तक आयोजित एडीपीए की 20वीं वर्षगांठ के कार्यक्रमों के दौरान हुई। एडीपीए में भारत के पास ‘पर्यवेक्षक’ का दर्जा है, जो इसे अफ्रीकी हीरा उत्पादक देशों के साथ जुड़ने के लिए संस्थागत मंच प्रदान करता है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि इससे कच्चे हीरों की आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित करने, तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान, मूल्य संवर्धन, बाजार तक पहुंच बनाने, और नैतिक व टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए सहयोग के अवसर मिलते हैं। भारत की अध्यक्षता में किंबरले प्रोसेस का मुख्य विषय है – ‘विश्वास, अनुपालन और विश्वसनीयता’ ।

लुआंडा की परामर्श बैठक में वैश्विक हीरा उद्योग की स्थिति और बदलती प्राथमिकताओं पर खुलकर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया। चर्चाओं में हीरा उत्पादक देशों और समुदायों की स्थिरता, केपी सचिवालय के लिए स्थायी फंडिंग और निरंतरता, प्रमाणन और सांख्यिकीय प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण, तथा ‘किम्बरली प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम’ (केपीसीएस) के अनुपालन को मजबूत करने जैसे विषय शामिल थे। प्रतिभागियों ने ‘कॉन्फ्लिक्ट डायमंड’ (संघर्ष-क्षेत्र से जुड़े हीरे) की परिभाषा में सुधार, जिम्मेदार सोर्सिंग, छोटे स्तर और जलोढ़ हीरा उत्पादन, उपभोक्ताओं का भरोसा, और प्रभावी रिपोर्टिंग तथा पीयर-रिव्यू (सहकर्मी-समीक्षा) तंत्र के महत्व पर भी विचार साझा किए।

केपी प्लेनरी से पहले 29 नवंबर को ‘नई दिल्ली डायमंड डायलॉग’ (केपी फोरम) आयोजित किया जाएगा, और इससे जुड़े अन्य कार्यक्रम 5 दिसंबर तक चलेंगे। भारत तीसरी बार केपी प्लेनरी की मेजबानी करेगा; इससे पहले भारत 2008 और 2019 में भी इसकी अध्यक्षता कर चुका है।

किंबरले प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम (केपीसीएस) को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 55/56 (2000) के अंतर्गत स्थापित किया गया था। यह अंतरराष्ट्रीय पहल है। इसका उद्देश्य ‘कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स’ (संघर्ष वाले क्षेत्रों से आए हीरे) को वैध कच्चे हीरे के व्यापार में शामिल होने से रोकना है। केपी त्रि-पक्षीय ढांचे के माध्यम से काम करता है, जिसमें सरकारें, हीरा उद्योग और नागरिक समाज शामिल हैं।

वर्तमान में इसमें 60 प्रतिभागी हैं जो 86 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देश एकल इकाई के रूप में भाग लेते हैं। किंबरले प्रोसेस की अध्यक्षता इसके सदस्य देशों के बीच हर साल बदलती रहती है, और भारत ने 1 जनवरी 2026 को इसकी अध्यक्षता संभाली है।

 

 

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