दिल्ली में औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़कर 370 पर पहुंचा

नयी दिल्ली, 05 नवंबर (वार्ता) राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार सुबह औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बढ़कर 370 पर पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है जबकि कई निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया।

जहांगीरपुरी सबसे प्रदूषित इलाका रहा, जहां एक्यूआई 459 दर्ज किया गया। इससे त्योहार के दौरान वायु गुणवत्ता में और गिरावट आने की आशंका बढ़ गयी है। लगातार चौथे दिन घने धुंध ने राष्ट्रीय राजधानी को अपनी चपेट में लिए रखा।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से जारी निगरानी आंकड़ों के अनुसार, कम से कम 10 निगरानी केंद्रों पर एक्यूआई 400 से अधिक दर्ज किया गया। अलीपुर, बवाना और पंजाबी बाग सहित कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में रहा। आंकड़ों के अनुसार, 59 निगरानी केंद्रों में से 18 पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 36 केंद्रों पर यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही। अधिकांश स्थानों पर पीएम2.5 प्रमुख प्रदूषक पाया गया, जबकि कुछ निगरानी केंद्रों पर पीएम10 प्रदूषण का मुख्य कारण रहा।

इस स्थिति ने पहले से बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर दिवाली समारोहों के संभावित प्रभाव को लेकर नयी चिंताएं पैदा कर दी हैं। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली ने संकेत दिया है कि त्योहार और पटाखों के संभावित इस्तेमाल के बीच छह और सात नवंबर को दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच सकती है।

उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में प्रमाणित हरित पटाखों की बिक्री और उन्हें जलाने की अनुमति दो दिन सात और आठ नवंबर के लिए दी है। अदालत ने कहा कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं कि केवल पूर्ण प्रतिबंध से क्षेत्र की बार-बार होने वाली प्रदूषण की समस्या का समाधान हो सकता है।

अदालत ने इन पटाखों के इस्तेमाल पर दो निश्चित समयसीमा लगाई हैं। दिवाली से एक दिन पहले और त्योहार के दिन सुबह छह बजे से सात बजे तक तथा रात आठ बजे से 10 बजे तक ही पटाखे जलाये जा सकेंगे। नौ नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू हो जायेगा।

इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण के एक अन्य प्रमुख मौसमी कारण पर कार्रवाई करते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तेज वृद्धि के बीच अपनी कार्रवाई बढ़ा दी है। खेतों में आग लगने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आयोग ने बुधवार को पंजाब के 12 जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में कार्रवाई के उपायों का आकलन किया गया और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के प्रयासों की समीक्षा की गयी।

सीएक्यूएम के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य के पर्यावरण और कृषि विभागों के सचिवों के साथ-साथ उन जिलों के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शामिल हुए, जहां खेतों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। आयोग ने जिला प्रशासन को निगरानी और कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया। साथ ही, निगरानी में कमी और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में विफल रहने के लिए नामित नोडल अधिकारियों को जवाबदेह बनाने को कहा। आयोग ने चेतावनी दी कि अपने दायित्वों का निर्वहन करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

 

 

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