मुंबई, 05 नवंबर (वार्ता) बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 2021 में एंटीलिया के पास विस्फोटक मिलने और उसके बाद ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या से जुड़े मामले में मुंबई पुलिस के बर्खास्त अधिकारी सचिन वाजे की जमानत याचिका गुरुवार को रद्द कर दी।
न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस अपील को स्वीकार कर लिया, जो विशेष एनआईए अदालत के 29 सितंबर के उस आदेश के खिलाफ दायर की गयी थी, जिसमें पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट वाजे को जमानत दी गयी थी।
पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए जांच एजेंसी की दलीलों को मानते हुए विशेष अदालत के आदेश को रद्द कर दिया।
यह मामला 25 फरवरी 2021 का है, जब दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास ‘एंटीलिया’ के पास एक महिंद्रा स्कॉर्पियो गाड़ी मिली थी, जिसमें जिलेटिन की छड़ें और एक धमकी भरा पत्र रखा हुआ था। यह वाहन मनसुख हिरेन का था, जिन्होंने पहले ही इसके चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज करायी थी। बाद में 5 मार्च 2021 को ठाणे की एक खाड़ी से हिरेन का शव बरामद हुआ।
एनआईए ने 13 मार्च 2021 को वाजे को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप था कि उन्होंने अंबानी के आवास के पास विस्फोटक से भरा वाहन खड़ा करने और हिरेन की हत्या की साजिश रचने में भूमिका निभायी थी। एनआईए की विशेष अदालत ने 29 सितंबर 2026 को वाजे को जमानत दे दी। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई सामग्री से यह साबित नहीं होता कि ‘गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम’ (यूएपीए) की सख्त धाराएं यहां लागू होती हैं, जिसके आधार पर जमानत रोकी जा सके।
एनआईए ने इस फैसले को चुनौती दी। उनका तर्क था कि विशेष अदालत ने सबूतों और कथित साजिश की गंभीरता पर ठीक से विचार नहीं किया है। वाजे ने लंबे समय से जेल में रहने का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी और खुद पर आतंकवाद-रोधी कानून लागू किये जाने का विरोध किया था।
उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को जमानत आदेश पर रोक लगा दी, जिससे वाजे की रिहाई रुक गयी और मामला अपील के दौरान लंबित रहा।
पीठ ने बहस पूरी होने के बाद 17 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
उच्च न्यायालय के आज के फैसले के बाद अब मामले की कार्यवाही जारी रहने तक वाजे हिरासत में ही रहेंगे।
