
इंदौर. दीपावली पर आतिशबाजी के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है. पटाखे हमेशा खुले और समतल स्थान पर जलाएं. आसपास पेड़, झाड़ियां, वाहन, इमारतें और ज्वलनशील पदार्थ न हों. संकरी गलियों में आतिशबाजी से बचें और बच्चों को बड़ों की निगरानी में ही पटाखे जलाने दें.
पटाखे जलाते समय सूती कपड़े और बंद जूते पहनें. पास में पानी से भरी बाल्टी रखें. एक बार में एक ही पटाखा जलाएं और उसे हाथ में पकड़कर न जलाएं. पटाखे जलाने के लिए लंबी मोमबत्ती या फुलझड़ी का उपयोग करें और चेहरे व शरीर को पटाखों से दूर रखें. अधजले पटाखे को देखने के लिए उसके पास न झुकें. कम से कम 20 मिनट इंतजार करने के बाद उस पर पानी डालकर निष्क्रिय करें. पटाखे किसी राहगीर या जानवर की ओर न फेंकें. अस्थमा और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को आतिशबाजी के दौरान घर के भीतर रहने की सलाह दी गई है. पटाखों से जलने पर प्रभावित हिस्से को तुरंत साफ ठंडे पानी से धोएं. जलने से पहले अंगूठी या अन्य आभूषण पहने हों तो उन्हें सावधानी से निकाल दें. आंख में चोट लगने पर उसे रगड़ें नहीं, बल्कि साफ पानी से धीरे धीरे धोएं. गंभीर जलने, घाव या धमाके से चोट लगने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाएं. स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को भी पटाखों से होने वाली जलने और धमाके की चोटों के उपचार के लिए आवश्यक दवाइयां और संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि दीपावली पर थोड़ी सी सावधानी रखकर आतिशबाजी से होने वाली दुर्घटनाओं और चोटों से बचा जा सकता है. उन्होंने सभी को सुरक्षित दीपावली मनाने की शुभकामनाएं देते हुए पटाखों का उपयोग सावधानी से करने की अपील की.
