ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
इंडिया गठबंधन ने इसी पहली तारीख को कथित वोट चोरी के खिलाफ दिल्ली में “वोट बचाओ, देश बचाओ” रैली रखी थी। इस रैली को हल्के में लेना भिंड और गुना के युवक कांग्रेस अध्यक्षों को महंगा पड़ा है। उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है। कार्रवाई की गाज सिर्फ ग्वालियर संभाग के मनीष पुरोहित और पंचम भील जैसे जिलाध्यक्ष पर ही नहीं गिरी है बल्कि ग्वालियर की नुमाइंदगी करने वाले प्रदेश महासचिव शिवराज यादव सहित कई महासचिव, उपाध्यक्ष और सचिव भी राष्ट्रीय नेतृत्व के कोपभाजन बने हैं और इन्हें पद से रुखसत करते हुए निलंबन का फरमान थमा दिया गया है। इधर कार्रवाई का शिकार बने पदाधिकारी हैरत में हैं। इनमें से ज्यादातर का यही कहना है कि पारिवारिक व्यस्तताओं के कारण उन्होंने दिल्ली रैली में शामिल न हो पाने की असमर्थता से पहले ही संगठन को वाकिफ करा दिया था। हां, इनमें से कुछ पदाधिकारियों ने पलटवार करते हुए कहा है कि उन्हें न तो कहीं से कॉल आया और न ही संगठन ने कार्यक्रम भेजा, जबकि पूर्व में पार्टी की तरफ से हर बड़े ईवेंट की जानकारी समय रहते भेजे जाने की परम्परा रही है ताकि वे तैयारी कर सकें लेकिन संगठन इस बार के मेगा इवेंट को लेकर इसी भुलावे में रहा कि अखबार पढ़कर सब पहुंच जाएंगे !
घरवापसी के प्लान पर चंबल वालों का वीटो…
पंजा पार्टी में कुछ बड़े सूबाई नेता चाहते हैं कि कुछ ही महीने बाद होने वाले निकाय चुनाव और 28 की चुनौती को देखते हुए ऑपरेशन घरवापसी चलाया जाए लेकिन ग्वालियर शहर और देहात, दोनों ही सदरों ने इस पर अपनी रजामंदी नहीं दी है। दरअसल मार्च 2000 में कमलनाथ सरकार के तख्तापलट के लिए ग्वालियर से चले ऑपरेशन लोटस के समय कई पुराने कांग्रेसियों ने व्यक्तिगत निष्ठा और अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता करते हुए पंजे को छिटककर भगवा पहन लिया था। नए आशियाने में कुछ को ठीक ठाक ठौर मिला और कुछ अब तक हाशिए पर हैं। अब यही नवागत भगवाई कांग्रेस में स्थापित पुराने वर्चस्व को यादकर घर लौटने की जोड़तोड़ बिठा रहे हैं। पुराने लोगों से पार्टी को मजबूत मिलने की आस में सूबाई नेतृत्व इन्हें वापस लेने पर राजी है लेकिन यह शर्त भी लगा दी है कि जिलाध्यक्षों की सहमति के बिना वापसी के लिए घर के दरवाजे नहीं खुलेंगे। इस पर जिलाध्यक्षों का कहना है कि संकट में साथ छोड़ने वाले मौकासपरस्तों का क्या भरोसा, उन्हें वापस लेकर कांग्रेस के माहौल को प्रदूषित न किया जाए।
अरविंद के कार्यकर्ता मिलन से लालसिंह गायब
प्रदेश की राजनीति में भिंड भाजपा के चेहरे माने जाने वाले पूर्व मंत्रियों अरविंद भदौरिया और लालसिंह आर्य के बीच यूं तो अच्छे रिश्ते हैं और राज्यसभा के टिकट से लेकर संगठन की वजनदार जिम्मेदारियों को संभालने तक दोनों की ही ओर से एक समान दावेदारियां की जाती रही हैं। इसे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी कह सकते हैं लेकिन दो दिन पूर्व कुछ ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने चंबल के सभी सियासतदानों का ध्यान खींचा। दरअसल, पार्टी के प्रदेश कोर ग्रुप के सदस्य अरविंद ने भिंड के एक होटल में अपने विधानसभा क्षेत्र का कार्यकर्ता मिलन समारोह रखा। इसके निमंत्रण पत्र से लेकर बैनर तक में भिंड के सभी बड़े नेताओं के फोटो लगाए गए, नाम भी छापे गए लेकिन गोहद के लालसिंह को यह खुशनसीबी नहीं मिली। जबकि लालसिंह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के नाते संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर नम्बर दो की हैसियत रखते हैं। इतना होने पर भी दोनों तरफ से यही कहा जा रहा है कि इसमें असामान्य जैसा कुछ भी नहीं है। गौरतलब है कि पार्टी कोर ग्रुप ने हाल ही में राज्यसभा प्रत्याशी के लिए बनाए पांच नामों के पैनल में अरविंद और लालसिंह, दोनों को ही रखा था।
भाजपा असमंजस में! सतीश और सुरेन्द्र अब साथ साथ हैं…
कांग्रेस की दिल्ली रैली निबट गई, जवाब में भाजपा ने भी प्रदेश के बड़े शहरों में “लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ” पदयात्रा कर लीं लेकिन सत्ता दल के तमाम बड़े सूरमाओं का शहर होने के बावजूद ग्वालियर में भाजपा अभी तक पदयात्रा नहीं कर सकी है। पार्टी के नेता राजू पलैया की मानें तो अभी तक भोपाल से कार्यक्रम नहीं आया है और अब दीवाली के बाद ग्वालियर में यह पदयात्रा होने की उम्मीद है, वैसे भी तीस नवंबर तक का समय भाजपा को अराजकता हटाने के लिए मिला है। इधर, कांग्रेस रामलीला मैदान में बड़ी रैली करने के बावजूद अभी तलक भले ही ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा नहीं ले सकी हो लेकिन एक दूसरे से तंगदिली दिखाते रहे कांग्रेस के दो स्थानीय दिग्गजों शहर सदर सुरेन्द्र यादव और एमएलए सतीश सिकरवार के बीच मनमुटाव जरूर दूर करा दिया है। रैली की तैयारियों के लिए ग्वालियर में बैठकें करने से लेकर दिल्ली में प्रदर्शन करने तक दोनों ने एकजुटता दिखाई।
