नई दिल्ली/गाजियाबाद, सर्दियों की दस्तक के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा को पार कर गया है। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) रेड जोन में पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 377 दर्ज किया गया है, जबकि अलीपुर (422), बवाना (411), जहांगीरपुरी (450), पंजाबी बाग (456) और आईआईटी दिल्ली (453) जैसे प्रमुख इलाकों में एक्यूआई 400 के पार रिकॉर्ड किया गया है, जिससे हवा में जहर घुल गया है।
गाजियाबाद और नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता खराब, ग्रेप-2 लागू होने के बावजूद प्रदूषण पर नहीं लग पा रही लगाम
केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि एनसीआर के अन्य शहरों का भी बुरा हाल है। गाजियाबाद का औसत AQI 236 और नोएडा का AQI 314 पर पहुंच चुका है, जिसमें नोएडा के सेक्टर-62 में तो प्रदूषण का स्तर 426 तक जा पहुंचा है। बिगड़ते हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण पहले ही लागू किया जा चुका है, बावजूद इसके स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्तर में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है और लोगों को खुली हवा में सांस लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
चिकित्सकों ने दी विशेष सावधानी बरतने की सलाह, सुबह-शाम टहलने से बचने और बच्चों-बुजुर्गों को सुरक्षित रखने की अपील
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार के अनुसार, हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 के सूक्ष्म कण फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे अस्थमा रोगियों, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सांस लेने में भारी परेशानी, गले में खराश और आंखों में जलन का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि इस जहरीले माहौल में सुबह-शाम खुले में वॉक करने या एक्सरसाइज करने से पूरी तरह बचा जाना चाहिए तथा जरूरत पड़ने पर ही घरों से बाहर निकलें।

