जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में महाधिवक्ता कार्यालय में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों को नियम विरुद्ध बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ के समक्ष सरकार की तरफ से मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 18 नवम्बर को निर्धारित की है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के संयुक्त सचिव योगेश सोनी की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति हेतु न्यूनतम 10 वर्ष की प्रैक्टिस अनिवार्य की गई है। महाधिवक्ता कार्यालय में नियुक्त किये गये कई अधिवक्ताओं के पास निर्धारित अनुभव नहीं है। नियुक्तियों में निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए अर्हता विहीन अधिवक्ताओं को नियुक्त किया गया। नियुक्तियों में किसी प्रकार की पारदर्शिता भी नहीं बरती गयी है। याचिका में नियुक्ति प्रक्रिया को मनमाना, पक्षपातपूर्ण और अधिसूचना के विपरीत बताया गया है। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।याचिका में लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने सरकार को निर्देशित किया है कि नियुक्तियों से संबंधित चयन प्रक्रिया का पूरा मूल रिकार्ड पेश किया जाये
