टेक्नोलॉजी के जरिए फाइब ने वित्तीय समावेशन को दी रफ्तार

क्रेडिट असेसमेंट से 1.57 करोड़ आवेदकों तक पहुंच बढ़ी, 20.2 लाख आवेदकों को मिली मंजूरी

मुंबई, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अब केवल कर्ज की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए उसे आसानी से तलाशने, हासिल करने और चुकाने की सुविधा भी अहम भूमिका निभा रही है। फाइब ने तकनीक आधारित ऋण मंच तैयार किया है, जिसमें पर्सनल लोन और पर्पज ड्रिवन फाइनेंसिंग को एक साथ जोड़ा गया है।

फाइब के ऋण कारोबार का प्रमुख हिस्सा उसका पर्सनल लोन है। इसके तहत डिजिटल माध्यमों से व्यक्तिगत जरूरतों के लिए बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे कर्ज दिया जाता है। कर्ज की पात्रता, राशि, अवधि और ब्याज दर का निर्धारण कंपनी के आंतरिक क्रेडिट आकलन स्कोरकार्ड के आधार पर किया जाता है।

31 मार्च 2026 तक फाइब के पर्सनल लोन ग्राहकों की औसत आयु 30 वर्ष और औसत मासिक आय 39,434.52 रुपये थी। प्रति ऋण औसत राशि 86,547.12 रुपये रही। कर्ज चुकाने की अवधि अधिकतम 36 महीने थी, जबकि औसत अवधि 16 महीने रही। कंपनी की सेवाएं भारत के 416 शहरों के 6,981 पिन कोड में उपलब्ध थीं।

वित्त वर्ष 2026 में फाइब ने 12,702.24 करोड़ रुपये के 14.7 लाख पर्सनल लोन वितरित किए। इनमें 5.20 लाख ऋण नए ग्राहकों को और 9.48 लाख मौजूदा ग्राहकों को दिए गए। 31 मार्च 2026 तक पर्सनल लोन के तहत AUM 6,656.76 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024 में यह 3,483.03 करोड़ रुपये था।

पर्पज ड्रिवन फाइनेंसिंग के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, बीमा प्रीमियम, यात्रा, रूफटॉप सोलर और ई-कॉमर्स जैसी श्रेणियां शामिल हैं। 31 मार्च 2026 तक फाइब के पास 10,387 से अधिक कारोबारी साझेदार थे, जबकि वित्त वर्ष 2024 में इनकी संख्या 3,294 थी।

इस श्रेणी की AUM वित्त वर्ष 2024 के 581.13 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 1,945.98 करोड़ रुपये हो गई, जिसमें 83 प्रतिशत की CAGR दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026 में यह कंपनी की कुल AUM का 22.62 प्रतिशत रहा।

कंपनी की दोनों ऋण सेवाओं में तकनीक की अहम भूमिका है। वित्त वर्ष 2026 में फाइब के डिजिटल नेटवर्क पर 1.57 करोड़ आवेदकों की प्रक्रिया पूरी की गई, जिनमें से 20.2 लाख को क्रेडिट असेसमेंट के तहत मंजूरी मिली। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की ऋण मंजूरी व्यवस्था में 27,500 से अधिक मानकों का इस्तेमाल किया जा रहा था, वहीं 95 प्रतिशत ऋणों की प्रक्रिया स्वचालित निर्णय प्रणाली के जरिए पूरी की गई।

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