
ग्वालियर। शासकीय कन्या विद्यालय प्रहलादपुरा परिसर विजयपुर पहुंचे सीईओ, विकासखंड शिक्षा अधिकारी अशोक डंडोतिया, बीआरसीसी उमाकांत वशिष्ठ एवं प्राचार्य गणेश जाटव ने छात्राओं के बीच पहुंचकर उनसे संवाद किया। इसके पश्चात उन्होंने छात्राओं के साथ एक ही स्थान पर बैठकर मध्यान्ह भोजन किया। अधिकारियों को अपने बीच पाकर छात्राओं में भी उत्साह देखने को मिला।
शासन की विद्यार्थी हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति जानने तथा बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लेने के उद्देश्य से जनपद पंचायत सीईओ विजयपुर पवन घुरैया शासकीय कन्या विद्यालय, प्रहलादपुरा परिसर विजयपुर पहुंचे।
जिला कलेक्टर श्योपुर के निर्देशन में शासन द्वारा संचालित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नियमित रूप से पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास में सहयोग देना, कुपोषण की समस्या को कम करना तथा विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति और शिक्षा के प्रति रुचि को बढ़ावा देना भी है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जनपद पंचायत सीईओ पवन घुरैया ने विद्यालय पहुंचकर छात्राओं के साथ मध्यान्ह भोजन किया। अधिकारियों का बच्चों के साथ बैठकर भोजन करना इस बात का संदेश देता है कि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए। विद्यालयों में संचालित योजनाओं की सफलता के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षा विभाग एवं विद्यालय प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। सभी अधिकारियों की मौजूदगी में विद्यालय में संचालित मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई तथा विद्यार्थियों के हित में शासन द्वारा संचालित योजनाओं के महत्व पर जोर दिया गया।
*बच्चों के पोषण और शिक्षा पर विशेष ध्यान*
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण विद्यार्थी कल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को विद्यालय में पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है। पौष्टिक भोजन मिलने से बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ उनकी विद्यालय में नियमित उपस्थिति को प्रोत्साहन मिलता है। इसके अलावा एक साथ बैठकर भोजन करने से बच्चों में आपसी सहयोग, समानता और सामूहिकता की भावना भी विकसित होती है।
