सत्ता विरोधी लहर को कुंद करने के लिए भाजपा ने बनाई बहुस्तरीय रणनीति 

प्रवेश कुमार मिश्र 

नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर को कुंद करने के लिए भाजपाई रणनीतिकारों ने बेहद आक्रामक और फुलप्रूफ रणनीति बनाई है.

सूत्रों की मानें तो जहां एक तरफ त्रिस्तरीय मेगा अभियान के तहत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दर्जनों रैलियां आयोजित की जाएगी वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा सांगठनिक माइक्रोमैनेजमेंट के जरिए जमीनी स्तर पर पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर बूथ जीतों चुनाव जीतों की रणनीति पर कार्य किया जाएगा. इतना ही नहीं मध्यप्रदेश,बिहार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे हिंदी भाषी राज्यों के भाजपा सांसदों व विधायकों को जातीय व सामाजिक समीकरणों को साधने व जमीनी स्तर पर मोर्चाबंदी मुकम्मल करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. सूत्रों की मानें तो आंतरिक सर्वे रिपोर्टों और राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय नेतृत्व द्वारा चुनाव प्रचार की पूरी रूपरेखा तैयार की गई है.

सूत्र बता रहे हैं कि त्यौहारों के बाद उत्तर प्रदेश में बड़े नेताओं का तूफानी दौरा शुरू हो जाएगा, जिसके तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य के सभी प्रशासनिक मंडलों और कमिश्नरियों में विशाल चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे. इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी प्रदेश का सघन दौरा कर हर विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर अधिक से अधिक जनसभाएं और सांगठनिक बैठकें करेंगे ताकि कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार किया जा सके. इतना ही नहीं चुनावी तैयारी में मध्यप्रदेश ,बिहार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे हिंदी भाषी राज्यों के भाजपा सांसदों व विधायकों का स्पेशल टास्कफोर्स तैनात किया जा रहा है.पार्टी विशेष रणनीति के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दूसरे राज्यों के दो विधायकों को जबकि हर दो विधानसभा क्षेत्रों पर दूसरे राज्य के एक सांसद को तैनात करने जा रही है. बताया जा रहा है कि दूसरे राज्यों से आने वाले सांसदों व‌ विधायकों की जिम्मेदारी बेहद रणनीतिक रूप से तय की जा रही है. पार्टी नेतृत्व क्षेत्र विशेष की जटिल जातीय संरचना और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इन नेताओं को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है, ताकि वे अपने प्रभाव वाले वर्गों को लामबंद कर सकें. बूथ स्तर तक समन्वय स्थापित करने के लिए यह बाहरी टीम स्थानीय पदाधिकारियों के साथ मिलकर घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाएगी, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाताओं के बीच जाकर विपक्षी दलों के किसी भी भ्रामक नैरेटिव को बेअसर करना और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधा संपर्क साधना होगा. इतना ही नहीं पन्ना प्रमुखों के सहारे पार्टी का पूरा तंत्र हर पोलिंग बूथ पर 50-50 परिवारों तक पहुंचने के माइक्रो-प्लान पर कार्य करेगा. ऐसे में कहा जा रहा है कि सपाई रणनीति को मात देने के लिए भाजपाई रणनीतिकार चुनाव की तारीखों के एलान से काफी पहले ही सूबे की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचाने की तैयारी में हैं.

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