नई दिल्ली, 02 नवम्बर (वार्ता) तीनों सेनाओं का संगठन, मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ रक्षा प्रतिष्ठानों पर साइबर हमलों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल माध्यमों से लोगों की सोच को प्रभावित करने की बढ़ती चुनौतियों पर दो दिन की संगोष्ठी में गहन विचार मंथन कर रहा है। इसमें देश में उभर रहे सुरक्षा खतरों और सैन्यकर्मियों सहित उनके परिवारों को निशाना बनाने वाले तरीकों पर विचार किया जा रहा है। इसका आयोजन संगठन के तहत संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र ने किया है। इसमें भारत के बदलते सुरक्षा खतरों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में साइबर प्रौद्योगिकी के जरिए लोगों की सोच और सूचनाओं को प्रभावित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसमें ऐसे अभियानों में शामिल लोगों, उनके तरीकों और इस्तेमाल किए जाने वाले संदेशों पर भी विचार किया गया। इसके अलावा सैन्यकर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को निशाना बनाने तथा साइबर तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल माध्यमों से फैलाए जाने वाले भ्रामक प्रभावों के बढ़ते मेल पर चर्चा हुई।
वक्ताओं ने कहा कि उभरते खतरों को केवल प्रौद्योगिकी के नजरिये से समझना पर्याप्त नहीं है। इनके मनोवैज्ञानिक, संस्थागत और सामाजिक प्रभावों को भी समझना जरूरी है। संगोष्ठी में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, सरकारी अधिकारी, रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ, राजनयिक, शिक्षाविद, तकनीकी विशेषज्ञ और मीडिया प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसका उद्देश्य साइबर प्रौद्योगिकी के जरिए लोगों की सोच और सूचना के माहौल को प्रभावित करने से जुड़ी चुनौतियों और उनके प्रभावों पर अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श करना है। उद्घाटन सत्र में रक्षा साइबर एजेंसी के महानिदेशक रियर एडमिरल संजय सचदेवा, अध्ययन केन्द्र के महानिदेशक मेजर जनरल अशोक कुमार (सेवानिवृत्त), राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक नवीन कुमार सिंह, नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल ए एन प्रमोद और एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने हिस्सा लिया।

