गुना: श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से निकलकर एक चीता गुना जिले के जंगलों में पहुंच गया है।पिछले दो दिनों से चीते की मूवमेंट गुना के जंगलों में दर्ज की जा रही है। कूनो नेशनल पार्क से इस इलाके की दूरी करीब 150 किलोमीटर है।चीते की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। फिलहाल गुना और श्योपुर वन विभाग की संयुक्त टीमें गुना के सरखेड़ा क्षेत्र के जंगलों में डेरा डाले हुए हैं और चीते को सुरक्षित रेस्क्यू करने की कोशिशों में जुटी हुई हैं। चीते की हर मूवमेंट पर जीपीएस कॉलर और ग्राउंड ट्रैकिंग टीमों के जरिए नजर रखी जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
कूनो नेशनल पार्क और चीता प्रोजेक्ट
भारत में 1952 में चीते को पूरी तरह विलुप्त घोषित कर दिया गया था। इसके दशकों बाद, भारत सरकार के ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत सितंबर 2022 में नामीबिया और बाद में दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया।
लंबी दूरी तय करने का स्वभाव
चीते स्वाभाविक रूप से बड़े क्षेत्र (होम रेंज) की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। इससे पहले भी कूनो से निकलकर चीते शिवपुरी, श्योपुर के अन्य हिस्सों और राजस्थान की सीमाओं तक पहुंच चुके हैं।
सुरक्षा और कॉलर ट्रैकिंग
सभी वयस्क चीतों को रेडियो कॉलर पहनाया जाता है, जिससे उनकी लोकेशन लगातार ट्रैकिंग टीमों को मिलती रहती है। जैसे ही कोई चीता पार्क की सीमा से बाहर जाता है, ट्रैकिंग टीम उसे ट्रैक कर वापस सुरक्षित इलाके में लाने या उस पर निगरानी रखने का काम करती है।
इंसानों के लिए खतरा नहीं
चीते स्वभाव से काफी शर्मीले होते हैं और आमतौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते। वे ज्यादातर छोटे वन्यजीवों और मवेशियों का शिकार करते हैं। फिर भी सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग ऐसी स्थितियों में त्वरित कार्रवाई करता है।
