भोपाल। मेट्रो रूट में बाधा बनी 35 साल पुरानी आरा मशीनों की शिफ्टिंग शनिवार से आनन-फानन में शुरू हो गई। जिला प्रशासन ने संचालकों को पहले समझाइश के साथ नोटिस जारी किए थे, लेकिन जगह खाली नहीं की गई। इसके बाद प्रशासनिक अमला मशीनें हटाने पहुंचा।
इस दौरान संचालकों से नोकझोंक भी हुई। प्रशासन ने जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसी दौरान निजी जमीन पर मालिकाना हक के दस्तावेज नहीं दिखाने पर करीब सात आरा मशीनें सील कर दी गईं। हालांकि, ये मशीनें मेट्रो रूट में नहीं हैं।
नवभारत की टीम ने जब मौके पर पहुंचकर लोगों से बात की तो लोगों ने आरोप लगाया कि बीते 80 साल से यहां उनके दादा काम कर रहे थे और अब यह उनकी विरासत है। 35 साल से हम यहां काम कर रहे हैं लेकिन यहां अचानक प्रशासन के लोगों ने बिना नोटिस कार्यवाई की और वैध कागज होने के बाद भी मशीनों को निकाल फेंका।
उन्होंने आगे बताया कि प्रशासन ने उन्हें उनकी मालिकाना हक की जमीनों का मुआवजा नहीं दिया और जमीन से हटने की धमकी दी। लोगों ने बताया कि जमीन पर हाईकोर्ट में केस चल रहा है हमें सरकार मुआवजा दे तो हम आज ही यहां से हटने को तैयार है।
वहीं शहर तहसीलदार भूपेंद्र कैलासिया के मुताबिक, नासिर उद्दीन की निजी जमीन पर कब्जे का प्रकरण तहसीलदार न्यायालय में चल रहा था। संचालकों को नोटिस देकर मालिकाना हक के दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे पेश नहीं कर सके। इसके बाद बेदखली के आदेश जारी हुए।
