ढाका, 31 अक्टूबर (वार्ता) बंगलादेश के आशुला, गाजीपुर और मीरपुर औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर शनिवार को श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों, पथराव और तोड़फोड़ के बाद कम से कम 42 तैयार रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्रियों में कामकाज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना पड़ा है।
यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब सरकार ने रविवार को एक नया न्यूनतम वेतन बोर्ड गठित करने की घोषणा की है।
काठग्राम क्षेत्र में कम से कम 30 फैक्ट्रियों में उस समय उत्पादन रोकना पड़ा जब प्रदर्शन उग्र हो गए और पथराव में एक पुलिस अधिकारी के घायल होने की खबर है। आशुला इंडस्ट्रियल पुलिस के अनुसार ‘नईम निटवियर’ के श्रमिकों ने सुबह करीब 10 बजे काम का बहिष्कार कर सड़कों पर प्रदर्शन शुरू किया और आसपास की अन्य फैक्ट्रियों पर पथराव किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद दोनों पक्षों के बीच खदेड़-पछड़ हुई।
इसके अलावा कोलाबारी और चंद्र के बीच के इलाके में 12 फैक्ट्रियों में कामकाज बंद रहा, जहां श्रमिकों ने ढाका-तंगेल राजमार्ग को जाम कर दिया और न्यूनतम मासिक वेतन 30,000 टका (लगभग 242 अमेरिकी डॉलर) करने की मांग की।
मीरपुर-11 और कालशी क्षेत्रों में भी प्रदर्शनकारियों ने सड़क मार्ग जाम किए। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के उपायुक्त मोहम्मद नासिर रिकाबदार ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा कर उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोपहर 3 बजे तक स्थिति कुछ हद तक शांत हुई।
इससे पहले शुक्रवार को श्रम एवं रोजगार मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने ढाका के बिजयनगर स्थित श्रम भवन में बंगलादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन और बंगलादेश निटवेअर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक के बाद मंत्री ने आश्वासन दिया था कि रविवार को आधिकारिक तौर पर वेतन बोर्ड का गठन कर दिया जाएगा।
श्रमिकों की मांग है कि उन्हें 30,000 टका न्यूनतम वेतन दिया जाए और ब्लैकलिस्टिंग तथा मनमाने ढंग से छंटनी की प्रथा बंद की जाए। श्रम नेताओं का कहना है कि 31 अक्टूबर तक वादा किया गया वेतन बोर्ड न बन पाने के कारण श्रमिकों में असंतोष है।
श्री चौधरी ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि जब सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम उठा रही है, तो आगे विरोध-प्रदर्शन करना अनावश्यक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बाहरी तत्व श्रमिक संघों की आड़ में हिंसा भड़का रहे हैं। उन्होंने मीडिया और पुलिस से सीसीटीवी फुटेज के जरिए ऐसे घुसपैठियों की पहचान करने का आह्वान किया।
इसके साथ ही, मंत्री ने कारखाना मालिकों को निर्देश दिया है कि वे बकाया वेतन का भुगतान जल्द करें और यह सुनिश्चित करें कि हर महीने का वेतन अगले महीने के पहले सात दिनों के भीतर मिल जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और हिंसा से उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे समय पर वेतन भुगतान में बाधा आ सकती है।
