इंदौर:बैंक ऑफ बड़ौदा से लिए 11.05 करोड़ रुपए के ऋण में 3.53 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी दंपति को अग्रिम जमानत नहीं मिली. विशेष न्यायाधीश (ईओडब्ल्यू) अकबर शेख की अदालत ने संजय गुप्ता और उसकी पत्नी शालिनी गुप्ता की याचिका खारिज कर दी.दोनों गुड़गांव निवासी हैं और यशास एफआरपी मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के संचालक हैं. आरोप है कि ऋण की राशि कारोबार में लगाने के बजाय दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई.
साथ ही बैंक में बंधक 3.01 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की मशीनरी बिना अनुमति भोपाल की एक कंपनी को बेच दी गई. इससे बैंक और मध्यप्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम को आर्थिक नुकसान हुआ. ईओडब्ल्यू मामले की जांच कर रही है. अदालत ने कहा कि अभी महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाना और बैंक अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करना बाकी है. इसी आधार पर अग्रिम जमानत खारिज की गई. ईओडब्ल्यू की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुनीलमणि त्रिपाठी ने पैरवी की.
