दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.35% रहने का अनुमान, महंगाई और कमजोर मानसून बना सरकार के लिए बड़ी चुनौती

नई दिल्ली,  वैश्विक मंदी और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूत आर्थिक रफ्तार बनाए हुए है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा जारी ‘मंथली इकोनॉमिक रिव्यू’ (अक्टूबर 2026) रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। घरेलू मांग और मजबूत निवेश के दम पर अर्थव्यवस्था को यह मजबूती मिली है, जिसमें जीएसटी कलेक्शन में 15 फीसदी का उछाल, गाड़ियों की रिकॉर्ड सेल में 25 फीसदी की बढ़ोतरी और अगस्त महीने में औद्योगिक उत्पादन (IIP) में 8 फीसदी की शानदार तेजी का प्रमुख योगदान रहा है।

खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंची, प्याज और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में जुटी सरकार

आर्थिक मोर्चे पर विकास दर में तेजी के बीच महंगाई आम जनता और सरकार दोनों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी बनी हुई है। सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य पदार्थों की महंगाई का 7.74 फीसदी तक पहुंचना और कच्चे तेल के दामों में उथल-पुथल है। देश में प्याज की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं, जबकि चीनी और खाने का तेल भी महंगा हुआ है। महंगाई के इसी खतरे को देखते हुए आरबीआई ने रेपो रेट को 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। सरकार ने खाद्य तेलों पर कस्टम ड्यूटी घटाई है और प्याज की निर्बाध सप्लाई के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ ट्रेनें चलाकर कीमतों पर काबू पाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

कमजोर मानसून से खरीफ और रबी फसलों पर मंडराया संकट, विदेशी मुद्रा भंडार 721 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर बरकरार

कृषि क्षेत्र में इस वर्ष औसतन 13 प्रतिशत कम बारिश होने से देश के 104 संवेदनशील जिलों में सूखे जैसे हालात पैदा हुए हैं, जिससे धान का रकबा घटकर 433.62 लाख हेक्टेयर रह गया है। रिपोर्ट में अल नीनो के प्रभाव से आने वाली रबी फसलों के प्रभावित होने की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि, तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 अक्टूबर 2026 तक 721 अरब डॉलर के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया है, जो अगले 10 महीनों से अधिक के आयात के लिए पर्याप्त है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की बुनियादी आर्थिक स्थिति सुरक्षित और मजबूत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए सतत सतर्कता आवश्यक है।

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