
भोपाल। चेक बाउंस के मामले में लंबे समय से अदालत में पेश नहीं होने पर फरार घोषित किए गए मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी रमेश एस. थेटे को नागपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर गुरूवार को भोपाल जिला न्यायालय में पेश किया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कल्पना कोतवाल की अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें 10 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी गई। अदालत ने उन्हें प्रत्येक पेशी पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और परिवादी या गवाहों को प्रभावित नहीं करने सहित अन्य शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
मामला भोपाल निवासी प्रदीप रामटेके और रमेश एस. थेटे के बीच 11.50 लाख रुपये के वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है। परिवादी के अनुसार, थेटे ने व्यक्तिगत जरूरतों के लिए उनसे 11 लाख 50 हजार रुपये उधार लिए थे और भुगतान के लिए एचडीएफसी बैंक की नागपुर स्थित मनीष नगर शाखा का हस्ताक्षरित चेक दिया था। प्रदीप रामटेके ने चेक अपने इंडियन बैंक की अरेरा कॉलोनी शाखा में जमा किया, लेकिन चार अप्रैल 2024 को खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी ने न्यायालय में मामला दायर किया।
प्रकरण में लगातार पेशी पर अनुपस्थित रहने के कारण अदालत ने 23 मार्च 2026 को रमेश थेटे को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 299 के तहत फरार घोषित कर उनके खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। अदालत के आदेश के पालन में नागपुर के बेलतरोड़ी थाना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और भोपाल लाकर न्यायालय में पेश किया।
पेशी के दौरान बचाव पक्ष ने जमानत आवेदन प्रस्तुत करते हुए आरोपी को निर्दोष बताया और मामले को झूठा करार दिया। बचाव पक्ष ने स्थानीय जमानतदार उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए व्यक्तिगत मुचलके पर रिहाई की मांग की। अदालत ने परिस्थितियों पर विचार करने के बाद 10 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके पर जमानत मंजूर कर दी।
अदालत ने निर्देश दिया है कि रमेश एस. थेटे आगामी सुनवाई और प्रकरण की कार्यवाही में उपस्थित रहेंगे तथा किसी भी तरह का व्यवधान उत्पन्न नहीं करेंगे। वे परिवादी या संभावित गवाहों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे। बिना ठोस कारण लगातार दो पेशियों पर अनुपस्थित रहने की स्थिति में उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने आगे की सुनवाई के लिए मूल प्रकरण रिकॉर्ड अभिलेखागार से तलब किया है।
