गोविन्द बड़ोने ब्यावरा। राजगढ़ जिले की एक महिला 25 सालों से लापता अपने पति का आज तक इंतजार कर रही है. महिला ने पति की तलाश में अपना मकान तक बैच दिया. उसकी कुशलता के लिये वृद्धावस्था में भी वह निरंतर करवां चौथ का व्रत रख रही है.
सारंगपुर तहसील के ग्राम नैनवाड़ा की 70 वर्षीय वृद्धा पिछले 24-25 वर्षो से अपने लापता पति के सकुशल लौट आने की उम्मींद में सतत् रूप से करवां चौथ का व्रत रख रही है. उसको ईश्वर पर भरोसा है कि उसके पति जहां भी है सकुशल है और वे आज नहीं तो कल लौटकर आ जायेंगे. महिला अपने पति को ढूंढने मकान भी बेच चुकी है.
वृद्धा मंगी बाई ने ‘नवभारत’ को बताया कि 02 दिसंबर 2002 को भौरकाल में उनके पति पर्वतसिंह राजपूत बिना बताएं अपनी तीन बालिकाओं और दो अबोध बालकों को घर में सोता हुआ छोडक़र चले गये. वे बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के थे. गांव में वर्षो से निकलने वाली प्रभात फैरी में वे नियमित शामिल होते थे. उस दिन भी वे प्रभातफैरी से आए और सभी को सोते हुए भौरकाल में घर से चले गए.
मंगी बाई ने पति को ढंूढने के लिये अपना पुस्तेनी मकान तक बेच दिया. इससे प्राप्त होने वाली राशि को उन्होंने पति की तलाश में पूरे परिवार को विभिन्न धार्मिक स्थानों, तीर्थ स्थलों पर भेजा लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. इसके बाद वे जमीन बेचने तक पर आमदा हुई तो परिवारजनों की समझाईश पर वह मानी. हालांकि तब से लेकर आज तक वह न केवल करवां चौथ बल्कि अन्य सभी परंपरानुसार सुहागिन महिला द्वारा किये जाने वाले व्रत कर अपने पति की कुशलता की कामना करती है.
श्री मती मंगी बाई का कहना है कि उसके पति न केवल जीवित है बल्कि जहां भी है सकुशल है. साथ ही यह भी उसे भरोसा है कि वे कभी न कभी लौटकर जरूर आयेंगे.
महिला के दो बेटे गोपाल और हरि खेती करते है. उन्होंने मां के साथ परिश्रम कर कुछ वर्ष पूर्व ही अपना खुद का मकान बना लिया है. उन्हें भी मां की तरह भरोसा है कि एक दिन उनके पिता जरूर आयेंगे. वे कहते है कि उनका आज तक पता नहीं लगा है. उनके साथ कोई हादसा नहीं हुआ. वे स्वयं कही गये है. वे जरूर लौटेंगे.
पाश्चात्य संस्कृति के जिस दौर में कुछ महिलाओं ने जहां स्त्री जाति को कलंकित किया है उसी दौर में मंगी बाई जैसी महिला भी है जो अपने पति के लिये सर्वश्व न्यौछावर को तैयार है. उन्होंने अपने पति के प्रति जो समर्पण, स्नेह और त्याग प्रदर्शित किया है वह आधुनिक दौर में अविश्वसनीय सा लगता है.
