रियाद, इजरायली मीडिया ने खाड़ी क्षेत्र के उच्च स्तरीय राजनयिक सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोही समूह के साथ युद्धविराम (सीजफायर) सुनिश्चित करने के लिए 1 अरब डॉलर की पेशकश की है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान खुद सैन्य परिवहन विमान हरक्यूलिस के जरिए तेहरान पहुंचे थे। इस गुप्त दौरे का मुख्य उद्देश्य ईरान की मध्यस्थता से हूती हमलों को रोकना और पूरे क्षेत्र में तनाव को कम करना है, हालांकि इस वित्तीय हस्तांतरण की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
तेहरान में हुई इस महाबैठक में तुर्की, पाकिस्तान और ईरान के शीर्ष सैन्य व खुफिया प्रमुख हुए शामिल, कूटनीतिक समाधान पर जोर
तेहरान में आयोजित इस रणनीतिक बैठक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव और आईआरजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन और पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर भी शामिल हुए। सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर स्वीकार किया कि यह दौरा संबंधित पक्षों के बीच तनाव घटाने और कूटनीतिक रास्ते तलाशने की कोशिशों का हिस्सा था। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रियाद, कतर और पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों का समर्थन करता है।
तीन साल पुराने सार्वजनिक कर्मचारियों के वेतन भुगतान समझौते को लेकर अड़े थे हूती, सैन्य दबाव में नया समझौता न करने पर अड़ा सऊदी
रिपोर्टों के मुताबिक, हूती विद्रोहियों का मुख्य विवाद तीन साल पहले हुई उस अनौपचारिक समझ को लागू करने को लेकर है, जिसके तहत सऊदी अरब को हूती नियंत्रित क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन और बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय मदद देनी थी। इसके बदले हूतियों को सऊदी अरब पर हमले बंद करने थे। हालांकि, सऊदी अधिकारियों का रुख स्पष्ट है कि वे किसी सैन्य दबाव या धमकियों के तहत नया सीजफायर करने के पक्ष में नहीं हैं और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सहमति के बिना कोई कदम नहीं उठाएंगे।

