
जबलपुर। कान्हा नेशनल पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से टाइगरों की मौत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। सोमवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश वाई कोगजे तथा जस्टिस विवेक जैन को बताया गया कि वायरस के प्रभाव से टाईगर अपनी आक्रामक तथा शिकार करने की वास्तविक प्रवृत्ति भूल जाता है। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए विगत दिनों हुए दो टाइगरों की मौत के कारणों की रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 16 नवम्बर को निर्धारित की है।
मुम्बई के चेम्बूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की तरफ से दायर याचिका में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत हो चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि कान्हा रिजर्व में अप्रैल व मई माह में आठ बाघ की मौत हुई है। इन मौतों का कारण संदिग्ध कैनाइन डिस्टेंपर वायरस माना गया है।
अब तक 20 की हो चुकी है मौत
याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि कान्हा में अभी तक 20 टाइगरों की मौत संदिग्ध तौर पर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से हुई है। पांच टाइगरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण वायरस था। जिसमें से दो टाइगर को कोरेंटाइन उपचार के लिए रिजर्व के मुक्की हेल्थ सेंटर में रखा गया था। वायरस हवा में नहीं फैलता है, इसके फैलने का कारण कुत्ते व सामूहिक जल स्त्रोत हैं। जहां वन प्राणी पानी पीने के लिए आते है। प्रदेश सरकार की तरफ से बताया गया कि वायरस की रोकथाम के लिए कान्हा सहित प्रदेश में स्थित अन्य टाइगर रिजर्व में कुत्तों का वैक्सीनेशन किया गया है।
युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि सितम्बर तथा अक्टूबर माह में हुई दो टाइगरों की मौत के कारणों की रिपोर्ट पेश की जाये। इसके अलावा केंद्र सरकार को फंड में कटौती के संबंध में जवाब पेश करने के आदेश जारी किये हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह तथा अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने पैरवी की।
