सुप्रीम कोर्ट ने ‘ब्रेस्ट टैक्स’ पोस्ट पर छत्तीसगढ़ पुलिस की दर्ज प्राथमिकी पर उठाए सवाल

नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से कथित ‘ब्रेस्ट टैक्स’ (स्तन कर) पर फेसबुक पोस्ट में प्राथमिकी दर्ज करने के मामले में सवाल उठाते हुए सोमवार को टिप्पणी की थी कि जांच एजेंसियों को अप्रासंगिक मामलों के बजाय गंभीर अपराधों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ, सामाजिक कार्यकर्ता रूपनारायण एक्का की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत देने से इनकार करने को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति महादेवन ने टिप्पणी की, “इसमें प्राथमिकी दर्ज करने की क्या बात है? बड़े मामलों पर ध्यान केंद्रित करें न कि ऐसे मामलों पर।”

श्री एक्का की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि फेसबुक पोस्ट से किसी अपराध का पता नहीं चलता। उन्होंने कहा कि इसमें केवल यह विचार व्यक्त किया गया था कि महिलाओं के स्तनों को ढकने पर कर औरंगजेब ने नहीं, बल्कि किसी ब्राह्मण ने लगाया था। उन्होंने कहा कि भले ही यह ऐतिहासिक दावा विवादित या गलत हो लेकिन केवल इसी आधार पर इसे अपराध नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी की, “इसका मतलब है कि लोगों के पास बर्बाद करने के लिए बहुत समय है।” उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय ने इसी कारण अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की थी।

राज्य के वकील ने पीठ को बताया कि हालांकि उच्चतम न्यायालय ने नौ सितंबर को नोटिस जारी कर श्री एक्का को दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की थी फिर भी वह जांच के लिए पुलिस के सामने पेश नहीं हुए। पीठ ने कहा कि उन्हें जांच के लिए बुलाया जा सकता है और वह पेश होंगे जिसके बाद राज्य ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि उनको उपस्थित होने के लिए एक नोटिस जारी किया जा रहा है।

यह मामला जशपुर जिले के कुनकुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज एक प्राथमिकी से जुड़ा है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 299 और 353(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो क्रमशः धार्मिक मान्यताओं के जानबूझकर अपमान एवं समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने वाली जानकारी फैलाने से संबंधित हैं।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि 13 अप्रैल, 2025 को श्री एक्का ने हिंदू महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की जिसके बाद एक ब्राह्मण संगठन के अध्यक्ष दीपक मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 15 दिसंबर 2025 को श्री एक्का की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। तीन जुलाई को उनकी दूसरी याचिका भी खारिज कर दी गई; उच्च न्यायालय ने कहा कि परिस्थितियों में कोई खास बदलाव नहीं आया है और साथ ही इसी तरह के अन्य मामलों में उनकी कथित संलिप्तता का भी उल्लेख किया।

उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ सरकार के अधिवक्ता के अनुरोध पर मामले की सुनवाई चार दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी और श्री एक्का को जांच में सहयोग करने की शर्त पर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई न करने के अपने पहले के आदेश को बरकरार रखा।

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