श्री हरिवंश ने सोमवार को यहां संसद भवन परिसर के संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के उद्घाटन सत्र में स्वागत भाषण में यह बात कही।
उप सभापति ने कहा कि ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को मजबूत बनाना’ इस सत्र का विषय समयानुकूल और प्रासंगिक है। दुनिया भर के नागरिक संसदों से आर्थिक अनिश्चितताओं, प्रौद्योगिकी बदलाव, जलवायु परिवर्तन, जनस्वास्थ्य संकट और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की अपेक्षा करते हैं। ऐसे में संसदों को सतर्क, संवेदनशील और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘जन-केंद्रित’ और ‘मानवता सर्वोपरि’ दृष्टिकोण अपनाया गया। इसी सोच के तहत ब्रिक्स की कार्ययोजना का विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखा गया है।
श्री हरिवंश ने कहा कि ब्रिक्स के विस्तार से वैश्विक दक्षिण की आवाज और विश्वास को मजबूती मिली है। भारत की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन पर नई दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया गया, जिसमें वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और अधिक संतुलित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि संसदीय मंच पर होने वाली चर्चा से सदस्य और साझेदार देशों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने तथा लोगों के जीवन में सुधार लाने वाली संसदीय पहल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
