सिंगरौली :मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद जिला सिंगरौली के निर्देशन में विकासखंड चितरंगी के नवांकुर सेक्टर चितरंगी अंतर्गत पाँच ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों एवं नवांकुर सखियों का एक दिवसीय क्षमता वर्धन प्रशिक्षण रविवार को शासकीय स्व. जगन्नाथ सिंह स्मृति महाविद्यालय चितरंगी में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। रामचंद्र सेवा समिति चितरंगी द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रस्फुटन समितियों को सशक्त बनाना तथा ग्रामीण विकास एवं सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला समन्वयक राजकुमार विश्वकर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता विनोद विश्वकर्मा, नवांकुर संस्था के प्रतिनिधि शिवेंद्र धर द्विवेदी, दिलीप गुप्ता, राम सिंह, मास्टर ट्रेनर नीलू साकेत, राधा यादव, राजकुमार सिंह, प्रवीणा पांडेय, प्रसन्ना मिश्रा तथा पीरामल फाउंडेशन के गांधी फेलो हर्ष गुप्ता सहित विभिन्न समितियों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रस्फुटन समितियों की अवधारणा, गठन, नवांकुर योजना, लक्ष्य सृजन योजना, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, सामाजिक सुधार, नशामुक्ति और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि ये समितियां शासन की योजनाओं को आमजन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिसके लिए ग्राम स्तर पर जनभागीदारी और सामुदायिक विकास कार्यों में सक्रियता बेहद आवश्यक है।
प्रशिक्षण के दूसरे सत्र में समितियों के अभिलेखों के संधारण और दस्तावेजीकरण पर विशेष जोर दिया गया। नवांकुर संस्था रामचंद्र सेवा समिति चितरंगी के सचिव रजनीश साहू ने पदाधिकारियों को बताया कि बैठकों की कार्यवाही, गतिविधियों का विवरण, उपस्थिति और प्रस्तावों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण करने से कार्यों का प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार होता है, जिससे भविष्य में उपलब्धियों को प्रदर्शित करने में सुविधा मिलती है। जिला समन्वयक राजकुमार विश्वकर्मा ने प्रस्फुटन समितियों को सशक्त बनाने के लिए ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ाने तथा शासन और समितियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि समितियों को गाँव की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाना चाहिए। अंत में सभी पदाधिकारियों को अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने और ग्रामीण विकास में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
