नई दिल्ली, भारत और पोलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने नई दिल्ली में उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने वर्ष 2024 में स्थापित रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया। इस दौरान रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित प्रौद्योगिकियों और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने भारत-यूईएफ़टीए (मुक्त व्यापार समझौते) के महत्व को रेखांकित करते हुए आपसी आर्थिक संबंधों को नई गति देने की प्रतिबद्धता दोहराई।
वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य, रक्षा सह-उत्पादन और ‘इंडिया-पोलैंड स्टार्टअप ब्रिज’ की हुई शुरुआत
वार्ता के दौरान दोनों देशों ने आगामी 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन की संभावनाओं पर भी गंभीर मंथन हुआ, जिससे भारतीय रक्षा उद्योग को यूरोपीय तकनीकों का लाभ मिल सके। इसके साथ ही, दोनों देशों के युवा उद्यमियों और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘इंडिया-पोलैंड स्टार्टअप ब्रिज’ की औपचारिक शुरुआत की गई है, जिसके तहत भविष्य में टेक्नोलॉजी हैकाथॉन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
यूरोप में भारत के लिए रणनीतिक प्रवेश द्वार बना पोलैंड, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण किया गया साझा
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्वी यूरोप की छठी सबसे बड़ी और तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था होने के नाते पोलैंड भारत के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंचने का एक प्रमुख रणनीतिक द्वार है। प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क के बीच हुई इस बैठक में क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सुधारों की आवश्यकता पर भी एकमत दिखाई दिया। यूक्रेन संकट के बीच अग्रिम पंक्ति के देश के रूप में पोलैंड की भू-राजनीतिक स्थिति और भारत के साथ उसके गहरे होते कूटनीतिक रिश्ते वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक मजबूत व सुरक्षित बनाएंगे।

