श्री साय ने शनिवार देर रात दुर्ग में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में धान खरीदी की तारीख की आधिकारिक घोषणा की। राज्य सरकार पंजीकृत किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदेगी। इसके तहत किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान का उपार्जन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस खरीफ सीजन में कुल 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले वर्ष 140 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। इस तरह चालू सीजन के लिए खरीदी का लक्ष्य पिछले वर्ष की तुलना में 20 लाख मीट्रिक टन बढ़ाया गया है।
श्री साय ने कहा कि राज्य में धान खरीदी के लक्ष्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में धान खरीदी का लक्ष्य 98 लाख मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 160 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इस अवधि में लक्ष्य में कुल 62 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है। इस प्रकार पांच वर्षों में धान खरीदी का लक्ष्य करीब 63 प्रतिशत बढ़कर 1.63 गुना हो गया है।
इस वर्ष धान खरीदी प्रक्रिया में एग्रीस्टैक पंजीयन, टोकन व्यवस्था और बायोमेट्रिक सत्यापन को महत्वपूर्ण बनाया गया है। धान बेचने के इच्छुक किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य किया गया है।
खरीदी केंद्रों में किसानों को टोकन के माध्यम से निर्धारित तारीख पर ही धान बेचने की सुविधा मिलेगी। उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा।
इसके अलावा धान की गुणवत्ता और नमी के निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। निर्धारित सीमा से अधिक नमी होने पर धान की खरीदी अस्वीकार की जा सकती है।
धान खरीदी की निर्धारित समय-सीमा, समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ उपार्जन सीमा के बीच किसानों को पंजीयन सहित सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी करनी होंगी।
