भोपाल। त्योहारों के दौरान बाजारों में बढ़ती भीड़ के बीच फुटपाथों पर अस्थायी दुकानों का कारोबार भी तेज हो जाता है। लेकिन इन दुकानों के लिए जगह देने के नाम पर कथित वसूली के आरोपों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवभारत की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल के न्यू मार्केट और इंदौर के राजवाड़ा में 15 दिन के दौरान कथित वसूली का अनुमान करीब 1.70 करोड़ रुपये है।
भोपाल के न्यू मार्केट में 15 दिन में 86.25 लाख का अनुमान
भोपाल के न्यू मार्केट में करीब 800 स्थायी दुकानों के सामने लगभग 500 छोटी अस्थायी दुकानें लगने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दुकानों के लिए प्रतिदिन 1,000 रुपये के हिसाब से 15 दिन में 75 लाख रुपये की रकम बनती है।
इसके अलावा, खुले स्थानों पर लगने वाली करीब 100 बड़ी अस्थायी दुकानों से अतिक्रमण पर्ची के नाम पर प्रतिदिन 500 रुपये के हिसाब से 15 दिन में 7.50 लाख रुपये का अनुमान है। वहीं, करीब 500 अन्य छोटी दुकानों से 50 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 15 दिनों में 3.75 लाख रुपये की राशि बनती है।
इन तीनों मदों को जोड़ने पर न्यू मार्केट में 15 दिन की अनुमानित राशि 86.25 लाख रुपये बैठती है। ये आंकड़े रिपोर्ट में बताए गए अनुमान पर आधारित हैं, आधिकारिक रूप से प्रमाणित वसूली नहीं हैं।
इंदौर के राजवाड़ा में 400 अस्थायी ठीये
इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र में भी फुटपाथों और बाजारों के आसपास अस्थायी दुकानों का कारोबार चलने की बात रिपोर्ट में कही गई है। यहां करीब 400 ठीये बताए गए हैं। जगह और ग्राहकों की आवाजाही के आधार पर एक ठीये का रोजाना किराया 300 से 1,400 रुपये तक बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, राजवाड़ा में 15 दिन के दौरान करीब 84 लाख रुपये की रकम बनती है। न्यू मार्केट और राजवाड़ा के इन दोनों अनुमानों को जोड़ें तो कुल राशि 1.70 करोड़ रुपये से अधिक होती है।
न्यू मार्केट व्यापारी संघ अध्यक्ष ने क्या बताया?
न्यू मार्केट व्यापारी संघ के अध्यक्ष सुमित गंगराड़े के मुताबिक, बाजार में करीब 100 अस्थायी दुकानें भी लगती हैं। उन्होंने बताया कि एक अस्थायी दुकान लगाने के लिए बड़े व्यापारियों को रोजाना 500 रुपये तक दिए जाते हैं।
ग्वालियर के महाराज बाड़े में भी सवाल
ग्वालियर के महाराज बाड़े में त्योहारों के दौरान फुटपाथों, पार्कों के आसपास और प्रमुख सड़कों के किनारे अस्थायी दुकानें लगने से आवागमन प्रभावित होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट में कुछ जगहों पर फुटपाथ की जगह देने के नाम पर बड़ी रकम वसूले जाने के आरोपों का भी जिक्र है। ऐसे में अतिक्रमण पर कार्रवाई और उसकी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जबलपुर में ठेले-खोमचे वालों से वसूली के आरोप
जबलपुर में नगर निगम को बैठकी शुल्क से सालाना करीब 50 लाख रुपये की आय होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। वहीं, ठेले और फुटपाथ पर कारोबार करने वालों से कथित वसूली का अनुमान सालाना 18 से 20 करोड़ रुपये तक बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ा फुहारा क्षेत्र में रोजाना 400 से 2,500 रुपये, गोरखपुर में 300 से 2,000 रुपये और पांडे की मढ़िया व मेडिकल क्षेत्र में 100 से 400 रुपये तक लिए जाने की बात कही गई है। कुछ जगहों पर बिजली के लिए अलग से रकम देने का भी जिक्र है। ये आरोप और अनुमान हैं, इन्हें आधिकारिक रूप से प्रमाणित आंकड़े नहीं माना जाना चाहिए।
महापौर मालती राय ने क्या कहा?
भोपाल की महापौर मालती राय ने कहा कि न्यू मार्केट सहित शहर के अन्य बाजारों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार की जा रही है। कार्रवाई के दौरान दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर रखा अतिरिक्त सामान जब्त किया जाता है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना भी लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो, इसके लिए कार्रवाई जारी है।
