भोपाल। अरबों रुपये की जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में अदालत द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए गए। हालांकि, जेल जाने से पहले उनकी तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई, जिसके बाद उन्हें जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीनों के एक साथ अस्पताल में भर्ती होने और जेल दाखिले में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरोपियों में हरे कृष्णा कॉलोनाइजर के प्रबंध संचालक रामनाथ शर्मा, निदेशक अश्वनी शर्मा और कृषक नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था के अध्यक्ष श्यामनाथ शर्मा शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जेपी अस्पताल में उनका इलाज किया गया। इसके बाद शुक्रवार शाम आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के अधिकारी उन्हें आगे की मेडिकल जांच के लिए हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे। रात तक उनकी जांच जारी थी।
जेल भेजने से पहले बिगड़ी तबीयत
जानकारी के मुताबिक, अदालत में पेशी के दौरान आरोपियों की हालत सामान्य बताई गई थी। लेकिन न्यायिक अभिरक्षा के आदेश के बाद उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बताई। चिकित्सकीय जांच के दौरान किसी का रक्तचाप 200 से अधिक होने और किसी को हृदय संबंधी खतरे की आशंका जताए जाने की बात सामने आई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें जेल भेजने के लिए अनुपयुक्त बताया और अस्पताल में भर्ती कर लिया।
आरोपियों के जेल नहीं पहुंचने का मामला सामने आने के बाद जेल प्रबंधन ने ईओडब्ल्यू से जानकारी मांगी है। हालांकि, उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल में भर्ती रखने के कारणों की आधिकारिक मेडिकल पुष्टि होना बाकी है।
चुना भट्टी की बेशकीमती जमीन से जुड़ा मामला
यह मामला भोपाल के कोलार रोड स्थित चुना भट्टी क्षेत्र की कीमती जमीन से संबंधित है। आरोप है कि जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेजों में कुल रकबे और मूल स्वामित्व की महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज नहीं की गईं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कथित दस्तावेजी हेराफेरी के जरिए आसपास की शासकीय जमीन भी कई लोगों को बेच दी गई, जिससे शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
शिकायतकर्ता सुरेश कुमार जैसवानी ने आरोपियों पर शासकीय संपत्ति और राशि हड़पने के उद्देश्य से दस्तावेजों में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था।
2019 में दर्ज हुई थी एफ\आईआर
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने वर्ष 2019 में हरे कृष्णा कॉलोनाइजर के प्रबंध संचालक और अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी। मामले में चालान पेश होने के बाद अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए।
फिलहाल, तीनों आरोपियों की मेडिकल जांच और जेल दाखिले की प्रक्रिया को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
