शहर में लाखों लीटर पानी वाहनों की धुलाई में होता है बर्बाद

इंदौर: शहर जल आपातकाल घोषित भले ही नहीं हुआ हो, लेकिन स्थिति गंभीर है. शहर में समय रहते वाशिंग सेंटर पर पानी बर्बादी पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में पानी की पूर्ति करना नगर निगम के लिए टेढ़ी खीर बन सकता है. एक अनुमान के अनुसार शहर में करीब 7 सौ से ज्यादा वाशिंग सेंटर है, जिनसे लाखों लीटर पानी सफाई के नाम पर बर्बाद होता है. इससे बढ़कर यह है कि शहर के मोहल्लों और कालोनियों में वाशिंग सेंटर में चार गुना पानी गाड़ी धोने पर बर्बाद किया जाता है.
इस साल बारिश कम होने से शहर में एक दो महीने बाद जल आपातकाल शुरू हो जाएगा.

शहर में पानी की बर्बादी सबसे ज्यादा दो पहिया, चार पहिया वाहनों और बसों को धोने से होती है. वाशिंग सेंटरों पर एक कार धोने में 70 से 100 लीटर पानी लगता है. वहीं दो पहिया वाहन धोने में 25 से 40 लीटर पानी लगता है. साथ ही शहर से रोजाना चलने वाली बसों में 300 से 400 लीटर और ट्रैकों में 150 से 200 लीटर पानी सफाई करने में बर्बाद किया जाता है. बताया जाता है कि इंदौर आरटीओ में 35 लाख से ज्यादा वाहन रजिस्टर्ड है. यह संख्या 40 लाख भी हो सकती है. इसमें करीब 16 से 18 लाख दो पहिया तथा 10 लाख से ज्यादा कारें है. इसके अलावा करीब 5 हज़ार से ज्यादा बसें और 2 लाख से ज्यादा भार वाहन है.

ऐसी स्थिति में पानी बर्बादी का लीटर में आंकलन करना मुश्किल है, हां मगर मोटे तौर पर 20 से 50 लाख लीटर पानी रोजाना सिर्फ गाड़ियां धोने में बर्बाद किया जाता है. शहर में आधे से ज्यादा वाशिंग सेंटर टैंकरों से पानी खरीद कर वाशिंग का काम कर रहे हैं. कई वाशिंग सेंटरों के पास व्यवसायिक नर्मदा कनेक्शन और स्वयं के बोरिंग है. शहर में निजी टैंकर से पानी सप्लाई का धंधा भी करोड़ों में होता है. एक 4 से 5 हज़ार लीटर पानी का टैंकर 400 रुपए और बड़ा 8 से 10 हजार लीटर पानी का टैंकर 8 सौ से 9 सौ रुपए में आसानी पानी सप्लाई कर देता है. शहर में तालाब, ग्रामीण क्षेत्रों एवं निजी टैंकर से 1 हजार से ज्यादा टैंकर पानी बेचते है. उपरोक्त विषय में निगम अपर आयुक्त आशीष पाठक को कॉल किया था, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.

कहते हैं वाशिंग सेंटर संचालक
एलआईजी लिंक रोड पर कार वाशिंग सेंटर संचालक अरबाज़ ने कहा कि टैक्टर ट्रॉली वाला टैंकर 4 सौ रुपए में टंकी में खाली करता है. यह पानी दो दिन चलता है, जिसमें 25 से 30 गाड़ियां धुल जाती है. बड़ी और महंगी कारों में पानी ज्यादा लगता है. वाशिंग अंदर, बाहर और इंजन, चेचिस सहित पूरी धुलाई में 200 लीटर तक पानी लग जाता है. कनेक्शन और बोरिंग दोनों नहीं है. आरएनटी मार्ग की गली में कार वाश करने वाले लड़के नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि रोज 300 सौ लीटर पानी की टंकी, टैंकर से भरवाते है. तीन कारें धुल जाती है. छोटी जगह है तो व्यवस्था छोटी है.

कार वाशिंग में पानी की बर्बादी के आंकड़ा

1. शहर में करीब 7 सौ छोटे बड़े वाशिंग सेंटर
2. 35 लाख से ज्यादा छोटे बड़े वाहन (आरटीओ पंजीयन रिकॉर्ड के अनुसार)
3. दो पहिया वाहन में 20 , कार में 70 से 100 और भार वाहनों की धुलाई में 300 से 500 लीटर पानी लगता है
4. वाशिंग सेंटरों में नर्मदा, बोरिंग ओर टैंकरों से पानी का उपयोग
5. 4000 हजार लीटर का एक टैंकर दो दिन चलता है, यानि 2000 लीटर पानी एक दिन में एक वाशिंग सेंटर पर उपयोग होता है.
6. बोरिंग और नर्मदा लाइन से कनेक्शन वाले वाशिंग सेंटर का टैंकर के पानी से अंदाजा लगाया जा सकता है.
7. एक अनुमान के अनुसार शहर में रोजाना गाड़ियां धोने में 20 लाख से 50 लाख लीटर पानी बर्बाद किया जा रहा है.

Next Post

अग्नि सुरक्षा की अनदेखी पर पटाखा लाइसेंस निरस्त

Thu Oct 22 , 2026
इंदौर: शहर में पटाखा भंडारण एवं विक्रय में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर प्रशासन ने लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की. उक्त कार्रवाई राऊ तहसील के ग्राम पिगडंबर में दो दिन पहले सील किए गए सतनाम पटाखा एजेंसी के खिलाफ की गई है.शहर में राऊ तहसील के ग्राम पिगडंबर […]

You May Like