वाशिंगटन, 18 अक्टूबर (वार्ता) अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया है कि एच-1बी वीजा धारकों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताने वाली उनकी टिप्पणी ठीक नहीं थी।
भारत की कड़ी आपत्ति के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना का निशाना कर्मचारी नहीं, बल्कि कंपनियां और वीजा प्रणाली थी।
सीबीएस के एक टाउन हॉल में श्री वेंस ने कहा कि वीजा प्रणाली नियोक्ताओं को विदेशी श्रमिकों पर अत्यधिक नियंत्रण देती है, क्योंकि अमेरिका में उनकी कानूनी स्थिति उनकी नौकरियों पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, “अगर मेरा बयान पूरी तरह सही नहीं था, तो उसकी जिम्मेदारी मेरी है। कुछ वीजा धारकों या कुछ एच-1बी धारकों के बारे में मैंने जो कहा, वह इस पूरी श्रेणी पर लागू नहीं होता।”
श्री वेंस ने तर्क दिया कि एच-1बी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारी शोषण के शिकार हो सकते हैं, क्योंकि नौकरी जाने से अमेरिका में रहने की उनकी क्षमता खतरे में पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि कंपनियां कर्मचारियों की इस मजबूरी का फायदा उठा सकती हैं, क्योंकि उनकी नौकरी पर ही उनका देश में बने रहना निर्भर करता है।
श्री वेंस ने कहा, “उन्हें वापस उनके देश भेजा जा सकता है, जो मुझे लगता है कि नियोक्ताओं को बहुत ज्यादा अधिकार दे देता है।” उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनकी आलोचना उस वीजा व्यवस्था के खिलाफ थी, जो विदेशी कर्मचारियों के साथ ‘बंधुआ मजदूरों’ जैसा व्यवहार करने की गुंजाइश देती है।
इस महीने की शुरुआत में वीजा धोखाधड़ी पर एक संवाददाता सम्मेलन में श्री वेंस ने एच-1बी वीजा श्रमिकों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताया था और विदेशी आउटसोर्सिंग फर्मों पर अमेरिकी श्रमिकों के वेतन में कटौती करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा था, “यदि आप अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हैं, तो आप उसी पद पर रखे गए किसी अमेरिकी नागरिक से 20,000 अमेरिकी डॉलर कम कमा रहे हैं। यदि आपको इनमें से किसी विदेशी आउटसोर्सिंग फर्म द्वारा लाया गया है, तो आप इसी तरह के पद पर मौजूद किसी अमेरिकी नागरिक से 48,000 अमेरिकी डॉलर कम कमा रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही हैं और कम वेतन पर विदेशी श्रमिकों को ला रही हैं।
भारत ने श्री वेंस की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की थी और एच-1बी वीजा धारकों के इस वर्णन को ‘बेहद अपमानजनक’ करार देते हुए कहा था कि इसमें दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत के निहितार्थ हैं।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि इन टिप्पणियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में भारतीय पेशेवरों के योगदान की अनदेखी की है।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हमारा मानना है कि इस तरह की टिप्पणियां गैर-जरूरी हैं। यह इस सच्चाई को नजरअंदाज करती हैं कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवर बेहद शिक्षित हैं और वहां की अर्थव्यवस्था व नवाचार में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। मंत्रालय ने अमेरिका के विकास और समृद्धि में अप्रवासियों के योगदान का भी हवाला दिया और कहा कि पीढ़ियों से अप्रवासियों ने देश के आर्थिक और तकनीकी विकास को आकार देने में मदद की है।
मंत्रालय ने कहा, “ऐसी शब्दावली का सहारा लेना जिसमें दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत के निहितार्थ हों, बेहद अपमानजनक है।”

