इंदौर: कृषि में ड्रोन और आधुनिक मशीनों का बढ़ता इस्तेमाल युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खोल रहा है. इसी दिशा में शासकीय होलकर (मॉडल, स्वशासी) विज्ञान महाविद्यालय के बीज प्रौद्योगिकी विभाग की पांच दिवसीय कौशल विकास कार्यशाला के दूसरे दिन विद्यार्थियों को कृषि ड्रोन तकनीक और फार्म मशीनरी प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया.
इसमें ड्रोन की कार्यप्रणाली, लागत, संचालन, सावधानियों और लाइसेंस-पंजीकरण की जानकारी दी गई.
प्राचार्य डॉ. अनामिका जैन ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर तलाशने में मददगार होंगी. मुख्य अतिथि एवं शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष महेश पालीवाल ने कृषि ड्रोन को जल संरक्षण और कृषि कार्यों को सुविधाजनक बनाने में उपयोगी बताया. विशेष अतिथि डॉ. जे. बी. सिंह, अध्यक्ष, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने नवीन कृषि किस्मों और तकनीकी नवाचारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया. कार्यक्रम का संचालन प्रो. लव असाटी ने किया और आभार प्रो. नेहा श्री तिवारी ने माना.
ड्रोन संचालन से लाइसेंस तक की जानकारी
पहले सत्र में सहायक संचालक कृषि सुनीता वर्मा ने कृषि यंत्रों के उपयोग, रखरखाव और कार्यक्षमता की जानकारी दी. दूसरे सत्र में एडवेन्ट्रा प्राइवेट लिमिटेड के युवराज सिंह, उत्कर्ष और उनकी टीम ने ड्रोन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया. विद्यार्थियों ने ड्रोन के प्रमुख पुर्जों, लागत, संचालन, सावधानियों और लाइसेंस-पंजीकरण प्रक्रिया को समझा. विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के प्रति उत्साह को सराहनीय बताया। आयोजक सचिव प्रो. अशोक जाट ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए तैयार करना है
