२००७ में एमओयू करके बचायी २५ सौ करोड़ की जमीन, अब टुकड़ों में बेचने का धंधा

इंदौर: अधिकारियों की उदासीनता से करीब २५ सौ करोड़ रुपए की बेशकीमती जमीन आईडीए की योजना में शामिल नहीं हो सकी। जमीन को बचाने के लिए जमीन मालिक ने इन्वेस्टर मीट में एमओयू साइन करके शासन को सपना दिखाया कि ४९० करोड़ रुपए का निवेश कर ४ हजार लोगों को रोजगार दिया जाएगा। साथ  ही २८० करोड़ का एफडीआर भी आएगा। एमओयू में बताया कि कंपनी बिग मॉल निर्माण, रेस्टोरेंट चेन, बड़े होटल्स ओर रोजगार के संसाधन लगाएगी। वास्तव में हुआ कुछ भी नहीं। अब इस जमीन को टुकड़ों में बेचा जा रहा है।

ये जमीन एम आर १० फ्लाई ओवर के पास ग्राम कुमैडी की है। जमीन के सामने आईडीए की ही योजना पर आईएसबीटी बनाया गया है। एमआर १० सडक़ भी मास्टर प्लान और योजना का हिस्सा है। इस ५१ एकड़ जमीन को आईडीए की योजना में शामिल करने शासन ने रोक दिया था। उक्त जमीन को आईडीए की योजना से बचाने के लिए गुडग़ांव की जेकेएम इनवेस्मेंट प्रा. लि. कंपनी के अभिषेक मोदी ने २००७ की इन्वेस्टर मीट में शिवराज सरकार से एमओयू साइन किया था। इसमें निवेश और रोजगार के संशाधन का भरोसा दिलाया गया था। १९ साल बाद भी कोई निवेश नहीं आया।

वर्ष २०१० में एमपीआईडीसी के सतीश पेंढारकर  ने पत्र लिखा था कि तीन साल बाद भी निवेश नहीं आता तो क्यों ना एमओयू खत्म कर दिया जाए। इसके बाद जेकेएम ग्रुप के अभिषेक मोदी ने ढाई एकड़ जमीन पर एक ढांचा तैयार कर दिया। ढांचा केवल ढांचा ही रहा, इससे आगे काम शुरू ही नहीं हो पाया। इसके बाद निवेश की जगह ३ एकड़ जमीन पर आरके एनक्लेव आवासीय परिसर बना दिया गया। अब योजना से बचाई गई जमीन को टुकड़ों में बेचने का धंधा शुरू हो गया । गत सप्ताह ताज विवांता होटल का लोकार्पण भी इसी का हिस्सा है।

५१ एकड़ जमीन में से ४२ एकड़ जमीन आज भी अविकसित
उक्त ५१ एकड़ जमीन में से ४२ एकड़ जमीन आज भी अविकसित है। उक्त जमीन के सामने आईडीए योजना १६९ /ए पूर्ण विकसित होकर एयरपोर्ट की तरह आईएसबीटी जैसा विश्व स्तरीय बस अड्डा बनाया है। शासन से एमओयू साइन होने के ५ साल बीतने पर भी आईडीए और भोपाल के अधिकारियों ने उक्त ५१ एकड़ जमीन को लेकर घोर लापरवाही बरती। जमीन के सौदागर शासन से मिलकर करोड़ों रुपए की शासन को ही हानि पहुंचा रहे है। शासन के अधिकारियों ने भी अनदेखी एवं निष्क्रिय रुख करके  अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाने का काम किया है। उक्त जमीन आईडीए की १६९ /ए योजना में शासन रोकने की बजाय शामिल करने की २०१२ में ही अनुमति दे देता, तो आईडीए को  योजना विकसित करने और विकसित भूखण्डों से १५०० सौ करोड़ रुपए से ज्यादा मिलते, लेकिन आईडीए में कई मुख्य कार्यपालन अधिकारी पदस्थ होते रहे, लेकिन किसी ने भी उक्त बेशकीमती जमीन पर योजना लागू करने की हिम्मत नहीं की।

आईडीए भू अर्जन अधिकारी २६ जून २०२४ विकास योजना में शामिल करने शासन को पत्र लिखा , लेकिन भोपाल से कोई जवाब नहीं आया। इसको इस तरह से देखे कि ढाई एकड़ जमीन के सौदे में एक नंबर में ४५ करोड़ २२ लाख की रजिस्ट्री हुई है। चर्चा है कि उक्त ताज विवांता होटल (अमलतास ग्रुप) द्वारा करीब १५० करोड़ से ज्यादा में सौदा हुआ है।

जानकारों का कहना है कि एम आर १० सडक़ पर स्थित उक्त जमीन पर योजना लागू करता, तो शहर में सुनियोजित विकास के साथ शहर में इन्वेस्टमेंट का बड़ा हब विकसित होता। उसका फायदा राजस्व के रूप में शासन के खाते में जमा होता, जिसने अन्य योजनाओं का विकास भी किया जा सकता था। इस बारें में एम्पीसीडीसी कार्यकारी संचालक प्रीति यादव ने कहा कि एमओयू साइन किया था और पांच साल में निवेश नहीं किया तो जमीन पर वैधानिक आधार पर एमओयू खत्म होना चाहिए था। जमीन बेची भी नहीं जा सकती थी। अब होटल खुला ओर अन्य निर्माण हो रहे है, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।

एमओयू को खत्म करने का बजाय उल्टा यह हुआ
५१ एकड़ जमीन पर निवेश होने की बजाय जेकेएम ग्रुप को टीएनसीपी ने आवासीय अनुमति दे दी। नगर निगम कॉलोनी सेल ने आवासीय विकास अनुमति जारी कर दी।

निम्न खसरे नंबर है एमओयू वाली जमीन के
ग्राम कुमेड़ी के खसरा न. ३७,४४/१,४४/२,४५/२पार्ट, ४५/३/१,४५/३/२,४५/२,४७ पार्ट, ४८/१पार्ट, ४८/२पार्ट, ५५/१ पार्ट, ५५/२/२, ५७ पार्ट और ५९ पार्ट की कुल ५१ एकड़ जमीन को योजना से बाहर करने तहत षडयंत्र पूर्वक एमओयू साइन किया गया था।

आईडीए २४ में लिख रहा और एमओयू करने वाली कंपनी ने २३ में बेची जमीन
जेकेएम इनवेस्मेंट प्रा लि गुडग़ांव के अभिषेक मोदी ने अमलतास ग्रुप के सुरेश भदौरिया को ५ जुलाई २०२३ को ४५ करोड़ २२ लाख ५६ हजार ३५३ रुपए से जमीन की रजिस्ट्री की। रजिस्ट्री का पंजीयन क्रमांक श्व रूक्क १७९०९२०२३्रढ्ढ २०८७०४६ है और पंजीयन करने वाले अधिकारी हैं उप पंजीयक प्रदीप निगम इंदौर।

लोकायुक्त और आर्थिक अपराध में प्रकरण दर्ज
सूत्रों ने बताया कि उक्त मामले में लोकायुक्त और आर्थिक अपराध में प्रकरण दर्ज किया गया था। मामले में शासन के अधिकारियों ने सहयोग नहीं किया और लोकयुक्त से प्रकरण का खात्मा रिपोर्ट पेश कर दी गई। वहीं आर्थिक अपराध में प्रकरण पेंडिंग है।

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