श्रीमती सीतारमण ने बैंकों से जुड़े 12 सवालों वाली श्री यादव की सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में कहा, “अखिलेश जी, चुनावी हार सामने देखकर आप ऐसी बेतुकी और तथ्यहीन बयानबाजी पर उतर आए हैं। आगामी चुनाव में अपनी करारी शिकस्त निश्चित देखकर आपने जमीनी मुद्दों से मुंह मोड़ लिया है और हार के डर से लंबे सवालों की ढाल तलाश रहे हैं।”
वित्त मंत्री ने कहा कि जब विपक्ष के नेता के पास जमीनी स्तर पर करने के लिए कोई काम नहीं बचा है, तो जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह राजनीतिक प्रपंच रचा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में बैंकों का कायाकल्प हुआ है और उन्हें नया जीवन मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान ‘फोन बैंकिंग’ ने बैंकिंग क्षेत्र को तबाह कर दिया था, जबकि मोदी सरकार ने इसे फिर नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया।
श्रीमती सीतारमण ने श्री यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता उनके 2012 से 2017 के कार्यकाल के कथित कुशासन, भ्रष्टाचार और गुंडाराज को आज तक नहीं भूली है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की हताशा से साफ है कि वह चुनाव से पहले ही हार मान चुके हैं।
इससे पहले, श्री यादव ने भाजपा सरकार के 2014 से अब तक के बैंकिंग सुधारों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि सरकार उनके 12 सवालों का जवाब दे दे, तो बैंकिंग संबंधी समस्याओं से जूझ रही आम जनता को कुछ राहत मिलेगी।
सपा अध्यक्ष ने खातों में न्यूनतम शेष राशि नहीं रखने पर जुर्माना लगाने, एसएमएस, एटीएम और खाता रखरखाव जैसी सेवाओं के लिए शुल्क वसूलने तथा हर महीने नए शुल्क लगाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी पूछा कि छोटे कर्जदारों से कुछ हजार रुपये की वसूली के लिए एजेंट भेजकर उन्हें बदनाम क्यों किया जाता है।
बैंकिंग क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों के तौर पर ऋण वसूली संबंधी कानूनों, बैंकों की बेहतर वित्तीय स्थिति और डिजिटल भुगतान प्रणाली के विस्तार का उल्लेख किया जाता रहा है। इन उपायों से बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और ऋण वसूली की समस्याओं से निपटने का प्रयास किया गया है।
