विस्थापन के बाद नया मोरवा शहर को बसाने की कवायद तेज

सिंगरौली : एनसीएल परियोजना के कारण विस्थापन की जद में आ रहे मोरवा शहर को नए सिरे से बसाने की कवायद तेज हो गई है। हालांकि स्थानीय लोगों की मंशा के अनुरूप निगम क्षेत्र के ग्राम खिरवा और कुशवई में नए मोरवा शहर को बसाने की योजना पर अभी भी संशय बना हुआ है।एनसीएल प्रबंधन ने जिला प्रशासन से ग्राम खिरवा में करीब 50 हेक्टेयर शासकीय भूमि उपलब्ध कराने की मांग रखी है। वहीं खिरवा से सटे ग्राम कुशवई में वन विभाग को पौधारोपण के लिए दी गई 45 हेक्टेयर जमीन को भी नए शहर के विकास में शामिल करने की मांग उठने लगी है।

ग्राम कुशवई में वर्ष 2015 में करीब 45 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को पौधारोपण के लिए दी गई थी। इस भूमि पर लगभग 66 हजार पेड़ लगाए जाने का लक्ष्य बताया गया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि पौधारोपण का लक्ष्य धरातल पर नजर नहीं आया और जमीन लंबे समय से बंजर पड़ी है। अब इसी भूमि का उपयोग विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए किए जाने की मांग उठ रही है। इस संबंध में पूर्व विधायक रामलल्लू वैश्य ने एनसीएल के सीएमडी से मुलाकात कर पत्र सौंपा है। उन्होंने कुशवई की उक्त भूमि का उपयोग नए मोरवा शहर को बसाने के लिए किए जाने की दिशा में पहल की है। यदि इस जमीन को पुनर्वास योजना में शामिल करने की अनुमति मिलती है, तो विस्थापित परिवारों के लिए व्यवस्थित आवासीय क्षेत्र विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इधर नवागत कलेक्टर पर सब की उम्मीदे टिकीं हुई हैं।

खिरवा और कुशवई की जमीन से आकार ले सकता है नया मोरवा
प्रस्तावित योजना के तहत ग्राम खिरवा की करीब 50 हेक्टेयर शासकीय भूमि और ग्राम कुशवई की 45 हेक्टेयर भूमि को मिलाकर लगभग 95 हेक्टेयर क्षेत्र में नया मोरवा शहर विकसित करने की संभावना है। वहीं पर नगर निगम ने 20 एकड़ भूमि एलआईजी व एमआईजी बनाने के लिए आवंटित रखी है। हालांकि वन विभाग की कुशवई की जमीन को इस योजना में शामिल करने के लिए संबंधित विभागों की सहमति और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। यदि दोनों स्थानों की जमीन उपलब्ध हो जाती है, तो नए शहर को केवल आवासीय कॉलोनी तक सीमित रखने के बजाय एक व्यवस्थित शहरी क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां बाजार, स्कूल, धार्मिक स्थल, पशुपालन के लिए स्थान, लघु उद्योग और आवासीय परिसर विकसित करने की संभावनाएं हैं। इससे विस्थापित परिवारों को घर के साथ-साथ रोजगार और दैनिक जरूरतों से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकेगा।

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