
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हरदा जिले में बिजली कनेक्शन दिलाने के नाम पर कथित रूप से 11 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में आरोपी धर्मेंद्र सांखला को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट जस्टिस संजीव एस. कालगांवकर की पीठ ने शिकायतकर्ता की अपील को खारिज करते हुए लोकायुक्त भोपाल की अपील की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया।
भोपाल निवासी सवाईराम गुर्जर तथा लोकायुक्त के द्वारा दायर अपील में रिश्वत के मामले में आरोपी को जिला न्यायालय द्वारा दोषमुक्त किये जाने को चुनौती दी गयी थी। अभियोजन के अनुसार सवाईराम ने खेत में पांच हॉर्स पावर की मोटर के लिए स्थायी बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था। आरोप था कि बिजली विभाग में काम करने वाले लाइनमैन धर्मेंद्र सांखला और सब-इंजीनियर घनश्याम तिवारी ने कनेक्शन दिलाने के बदले रकम मांगी थी।
शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान धर्मेंद्र के पास से 11 हजार रुपये के पाउडर लगे नोट बरामद किए गए। उसके हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में डालने पर घोल गुलाबी हो गया था।एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग और आरोपी द्वारा रकम को रिश्वत समझकर स्वीकार करने की बात अविश्वसनीय रूप से साबित नहीं कर पाया।
बातचीत से यह संभावना भी सामने आई कि राशि बिजली कनेक्शन की आधिकारिक फीस से संबंधित थी।अनावेदक एक निजी ठेकेदार के माध्यम से नियुक्त संविदा श्रमिक था। वह बिजली कनेक्शन स्वीकृत करने या उपलब्ध कराने का अधिकार नहीं रखता था।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल रिश्वत के लिए चिह्नित नोटों की बरामदगी, मांग और दोषपूर्ण स्वीकारोक्ति के विश्वसनीय प्रमाण के बिना, दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। एकलपीठ ने जिला न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों अपील को खारिज कर दिया।
